



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- बड़सर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने शनिवार शाम भोटा अस्पताल में घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता के चलते एक युवक को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाया और उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने प्रदेश सरकार को बताया जिम्मेदार


विधायक ने जानकारी दी कि शनिवार को भोटा क्षेत्र के समीप शुक्कर खड्ड के पास एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए दो युवकों को जब त्वरित उपचार के लिए नजदीकी भोटा अस्पताल लाया गया, तो वहां न डॉक्टर मौजूद थे और न ही पैरामेडिकल स्टाफ। प्राथमिक उपचार के अभाव में एक युवक की हालत बिगड़ती गई और उसे जैसे-तैसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।



लखनपाल ने कहा, “यदि भोटा अस्पताल को कांग्रेस सरकार द्वारा सीएचसी से पीएचसी में डाउनग्रेड न किया गया होता और यहां आवश्यक चिकित्सकीय संसाधन उपलब्ध रहते, तो यह नौबत नहीं आती।” उन्होंने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए सीधे तौर पर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि भोटा अस्पताल एक रणनीतिक और अत्यंत संवेदनशील स्थान — राष्ट्रीय उच्च मार्ग (हाईवे) — के किनारे स्थित है, जहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद अस्पताल की स्थिति दयनीय बनी हुई है।

“मैंने इस विषय को कई बार सरकार के समक्ष उठाया है। विधानसभा के भीतर भी भोटा अस्पताल की बदहाली को लेकर आवाज बुलंद की, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया,” विधायक लखनपाल ने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद न केवल संस्थाओं को कमजोर किया गया, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र को राजनीतिक उपेक्षा का शिकार बना दिया गया। भोटा अस्पताल के साथ-साथ बड़सर सिविल अस्पताल और आरके मेडिकल कॉलेज की बदहाल स्थिति किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री स्वयं इस जिले से होने के बावजूद ढाई वर्षों में न डॉक्टरों की पर्याप्त नियुक्तियां हुईं और न ही स्वास्थ्य सेवाओं में कोई उल्लेखनीय सुधार किया गया।
विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शीघ्र ही सभी अस्पतालों में डॉक्टरों व विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की गई और भोटा पीएचसी में हुई लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा आमजन के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा हेतु सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।
















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