



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, विकास नगर में 9जुलाई,2025 को एक भव्य स्कॉलास्टिक पुस्तक मेले का आयोजन किया गया, जिसने छात्रों और शिक्षकों को एक साथ जोड़कर पठन संस्कृति का उत्सव मनाया।

इस पुस्तक मेले का आरंभ विद्यालय चेयरपर्सन प्रो. आर.सी. लखनपाल, वाइस चेयरपर्सन सी.पी. लखनपाल, प्रधानाचार्या इंजीनियर नैना लखनपाल तथा अकादमिक प्रधानाचार्या डॉ. हिमांशु शर्मा द्वारा किया गया।


“पुस्तकें दुनिया की खिड़कियाँ खोलती हैं और विचारों को परिवर्तित करने की शक्ति रखती हैं।”




इस अवसर पर शैक्षणिक समन्वयिका विनिता गुप्ता, मनीषा मारवाह, कंचन लखनपाल व शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत प्रतीकात्मक रीबन काटने के साथ हुई, जिसके पश्चात संजय बुक फेयर द्वारा प्रस्तुत रंगीन और आकर्षक पुस्तक स्टालों का अवलोकन किया गया।

इन स्टालों में विभिन्न आयु वर्ग और रुचियों को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रकार की पुस्तकें रखी गई थीं, जैसे—चित्रमय कहानी पुस्तकें, शैक्षणिक पुस्तकें, गतिविधि पुस्तकें, विश्वकोश, संदर्भ पुस्तकें, विज्ञान और सामान्य ज्ञान की पुस्तकें, पहेली और ब्रेन टीज़र, नैतिकता पर आधारित पुस्तकें, क्लासिक और समकालीन साहित्य, कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवेल्स। यह पुस्तक मेला 9 जुलाई से 11 जुलाई तक विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए खुला रहेगा।

अकादमिक प्रधानाचार्या डॉ. हिमांशु शर्मा ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि—”पढ़ना न केवल भाषा कौशल और रचनात्मकता को बढ़ाता है, बल्कि स्वतंत्र सोच की नींव भी रखता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से आगे जाकर पुस्तकें पढ़ने की प्रेरणा दी और इसे जीवन का आनंददायक हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
छात्र-छात्राएँ पुस्तकें चुनने को लेकर अत्यंत उत्साहित दिखे। शिक्षकों की मार्गदर्शिका में उन्होंने अपनी रुचि और स्तर के अनुसार पुस्तकें चयनित कीं। पुस्तक चयन की इस प्रक्रिया के दौरान पूरे परिसर में उत्सुकता, मुस्कान और पन्नों की सरसराहट की मधुर ध्वनि गूंजती रही l सम्पूर्ण पुस्तक मेले में कृष्णी देवी का भी बहुमूल्य सहयोग रहा, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।यह पुस्तक मेला केवल किताबों का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि ज्ञान, कल्पना और खोज की भावना का उत्सव था। यह आयोजन विद्यालय में एक मजबूत पठन संस्कृति को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति आजीवन प्रेम जागृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
















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