प्रदेश सरका पुराने पॉलीहाउसों का नवीनीकरण कर सकती है: प्रदेश सरकार

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ  :-   प्रदेश सरकार के सचिव (कृषि) डॉ. सी. पॉलरासु ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में पुराने और बेकार पड़े पॉलीहाउसों के नवीनीकरण में किसानों की सहायता करेगी। इसके लिए उच्च कृषि प्रौद्योगिकियों पर आयोजित कार्यशालाओं के समापन पर एक उपयुक्त योजना तैयार की जाएगी।

प्रदेश के लिए सब्जियों, मक्का और गेहूँ की 18 नई किस्में जारी

डॉ. पॉलरासु शुक्रवार को दो कार्यशालाओं के सयुंक्त उदघाटन समारोह में मुख्यातिथि के तौर पर बोल रहे थे। ये कार्यशालाएं ‘कृषि का सशक्तिकरण: हिमाचल प्रदेश में सतत खेती और फसल विविधीकरण के लिए कृषि-तकनीकी साझेदारी’ और ‘कृषि व्यवसाय विकास: हिमाचल प्रदेश में संभावनाएँ और अवसर’ पर आयोजित की जा रही हैं।

 

 

जिनका आयोजन जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के समर्थन से हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-II ने किया है। ये कार्यशालाएँ 19 और 20 सितंबर को SAMETI, (मशोबरा) में आयोजित की जा रही हैं।

कृषि सचिव ने क्षेत्रीय कृषि अधिकारियों से विभाग की पिछली दो योजनाओं के दौरान निर्मित पॉलीहाउसों के पुनरुद्धार की चुनौती स्वीकार करने और प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम चार पुराने पॉलीहाउसों को उन्नत बनाने का कार्य शुरू करने का आवाहन किया।

 

 

कार्यशाला के दौरान, डॉ. पॉलरासु ने ईईकेआई और ग्रीन लीफ संगठनों की ओर से प्रदर्शित उच्च कृषि तकनीक वाली दो प्रस्तुतियों को देखा और किसानों द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी उच्च तकनीकें ऊर्जा कुशल हैं जब किसान अधिक उत्पादकता से बहुत लाभ प्राप्त कर पाएंगे।

 

 

उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए अपने संबोधन में ब्लूबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें अपनाने का सुझाव दिया और सुंदरनगर-करसोग मार्ग पर कटेरू में एक नए लगाए गए पॉलीहाउस का उदाहरण दिया। उन्होंने यह भी बताया कि वहां लगाए गए 18,000 पौधों से लगभग पाँच करोड़ रुपये की आय होगी।

डॉ. पॉलरासु ने शुक्रवार को कहा कि राज्य वैरिएटल रिलीज कमेटी ने मटर, फूलगोभी, टमाटर, ब्रोकोली, शिमला मिर्च, खीरा, भिंडी, मिर्च, मक्का और गेहूं व मिर्च की 18 नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी दे दी है और किसानों को सलाह दी है कि वे अधिक लाभ के लिए चेरी टमाटर और अन्य नकदी फसलों की खेती शुरू करें।

डॉ. पॉलरासु ने परियोजना के स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ और शिटाके केंद्र द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी दौरा किया।

वरिष्ठ सलाहकार बी.एस. संधू ने मुख्य अतिथि डॉ. पॉलरासु का अभिनंदन किया, जबकि परियोजना के उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश कुमार (एमपीएच) ने कृषि निदेशक डॉ. आर.एस. जसरोटिया को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

 

इन कार्यशालाओं में कुल मिलाकर लगभग 125 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें विभिन्न उप-परियोजना क्षेत्रों से आये किसान, परियोजना के अधिकारी डॉ. डी.डी. शर्मा, उप परियोजना निदेशक (ए एंड ई), डॉ. करतार सिंह- उप निदेशक (एसडब्ल्यूसी), चार जिला परियोजना प्रबंधक- डॉ. रवींद्र ठाकुर, डॉ. संतोष शर्मा, डॉ. हेम राज वर्मा और डॉ. वाईपी कौशल, 16 ब्लॉक परियोजना प्रबंधक और परियोजना मुख्यालय के अधिकारी व विशेषज्ञ शामिल हैं।