आरोप: हिमफैड चेयरमैन चुने हुए बोर्ड सदस्यों की मंज़ूरी के बिना सरकारी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे- राकेश

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट में, हिमफैड के चुने हुए बोर्ड सदस्यों – भोरंज ज़ोन से राकेश ठाकुर, हमीरपुर ज़ोन से रविंदर पटियाल और चंबा ज़ोन से सोहन लाल ने हिमफैड के प्रबंध निदेशक और मुख्य प्रबंधक पर सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल करने और चुने हुए बोर्ड के अधिकार को नज़रअंदाज़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

 

उन्होंने कहा कि माननीय कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को 30 जून 2025 तक बोर्ड के अध्यक्ष और नॉमिनेटेड सदस्यों को नियुक्त करने का आदेश दिया गया था, इस शर्त के साथ कि यदि सरकार तय सीमा तक यह काम नहीं कर पाई तो बोर्ड के अध्यक्ष को निर्वाचित डायरेक्टरों में से ही चुन लिया जायेगा।

 

सरकार ने इसके बाद बोर्ड के गठन के लिए 16 जुलाई 2025 को चुने हुए डायरेक्टरों की एक मीटिंग बुलाई, लेकिन प्रबंध निदेशक को आपदा प्रबंधन ड्यूटी के लिए मंडी ज़िले में भेज दिया, और यह प्रक्रिया 26 जुलाई 2025 तक टाल दी गई। बाद में प्रबंध निदेशक बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी पर चले गए।

 

 

राकेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि घटनाओं का यह सिलसिला कोर्ट की अवमानना के बराबर है, क्योंकि सरकार न्यायिक आदेश का पालन करने में विफल रही और बजाय इसके, सितंबर 2025 में दो व्यक्तियों को हिमफैड के सदस्य और महेश्वर सिंह को अध्यक्ष के रूप में नॉमिनेट कर दिया।

 

 

उन्होंने दावा किया कि महेश्वर सिंह ने चुने हुए बोर्ड सदस्यों की मंज़ूरी या अप्रूवल के बिना अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया, और तब से वे सरकारी सुविधाओं और फंड का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

एक तरफ जहाँ हिमफैड गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और सरकारी गोदामों में किसानों के लिए खाद बिल्कुल ख़तम हो चुकी है, ऐसे में MIS का काम, जिससे पहले बोर्ड को प्रॉफ़िट होता था, उसे भी हिमफैड से छीनकर HPMC को ट्रांसफर कर दिया गया है।

 

 

जबकि घाटे में चल रही शराब की दुकानें, जो नीलामी प्रक्रिया में किसी भी ठेकेदार ने नहीं लीं, उन्हें ज़बरदस्ती हिमफैड को सौंप दिया गया, जिससे बोर्ड को करोड़ों का नुकसान हुआ।

 

सदस्यों ने सवाल उठाया कि पिछले ढाई साल से जब न तो प्रशासनिक निकाय और न ही बोर्ड का ठीक से गठन हुआ है, तो हिमफैड में वित्तीय कामकाज कैसे चल रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों को संस्था की बेहतरी और मुनाफ़े के लिए ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिए, न कि सिर्फ़ सरकार की मर्ज़ी के हिसाब से चापलूसी करनी चाहिए।

 

 

उन्होंने कहा कि अधिकारी ये भी जान लें कि भविष्य में हिमफैड में वित्तीय अनियमितत्ताओं के लिए सम्बंधित अधिकारीयों को भी जवाबदेह होना पड़ेगा।