



शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- रूमित सिंह ठाकुर ने पंचायती राज चुनाव को लेकर भाजपा कांग्रेस के 68 विधायकों पर करारा हमला बोलते हुए कहा, की अगर हिमाचल प्रदेश आपदाग्रस्त है और आपदा अधिनियम लागू है, और पंचायती राज चुनाव डिजास्टर एक्ट में नहीं हो सकते तो क्यों भाजपा कांग्रेस के 68 विधायकों के दैनिक भत्ते 1800 से 2500 किए गए?
क्यों 100 करोड़ के आवास बनाए जा रहे हैं ?जिसमें 36 करोड़ की पहली राशि जारी की जा चुकी है!
क्यों विधायकों की तनख्वाहों में बढ़ोतरी की गई?


अगर हिमाचल प्रदेश में डिजास्टर एक्ट लागू होने के बावजूद विधायकों के फायदे के लिए सब कुछ हो सकता है तो पंचायती राज चुनाव भी हो सकते हैं! जबकि राज्यपाल महोदय तय समय पर चुनाव करवाने के बारे में कह चुके हैं, निर्वाचन आयोग बार-बार कह चुका है !



अगर यह चुनाव नहीं करवा रहे तो यह बात तय है की हिमाचल प्रदेश में तीसरे विकल्प की जनता के बीच में बढ़ती हुई चर्चा को लेकर भाजपा कांग्रेस के नेता डर चुके हैं, और आने वाले चुनाव में 68 विधायकों को यह डर है की पंचायती राज चुनाव में भाजपा कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ेगा!
और प्रदेश की जनता अब भाजपा कांग्रेस को पंचायती राज चुनाव में भी और 2027 की विधानसभा चुनाव में भी सिरे से नकारने के लिए अपने कमर कस चुकी है!“मुख्यमंत्री जी, पंचायत चुनाव करवाने के समय आप Disaster Management Act का बहाना बनाकर देरी कर रहे हैं।
लेकिन उसी ‘आपदा’ के बीच में MLA की तनख़्वाह बढ़ाने में आपको ज़रा भी देर क्यों नहीं लगती?

क्या राज्य सिर्फ़ चुनाव के समय ‘आपदा’ में होता है, और वेतन बढ़ाने के समय ‘सुविधा’ में?
जनता पूछ रही है—पंचायत चुनाव रुक जाते हैं, पर नेताओं की तनख़्वाह बढ़ाने पर सरकार की ‘आपदा’ कहाँ गायब हो जाती है?
यह दोहरा चरित्र कब तक चलेगा? लोकतंत्र को रोका क्यों जा रहा है,
















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