रोजगार सृजन में फेल है, केंद्र सरकार: संदीप सांख्यान

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि देश मे बढ़ रही बेरोजगारी व महंगाई जैसे मुद्दे गौण होते जा रहे हैं, वर्तमान में जो बेरोजगारी के आंकड़े आए हैं वह बहुत चौकाने वाले हैं।

 

 

रोजगार के सरकारी और वास्तविक आंकड़ो में गहरी खाई: संदीप सांख्यान

 

देश मे करीब 39.37 करोड़ युवा, महिलाएं और प्रौढ़ असुरक्षित रोजगार से पीड़ित हैं और इनकी संख्या साल 2014 के बाद बढ़ती ही जा रही है। संदीप सांख्यान ने कहा कि केंद्र सरकार देश में कई व्यर्थ के मुद्दों पर बहस छेड़ती है लेकिन जिन मुद्दों से देश की गरीबी मिटेगी उन मुद्दों पर से ध्यान हटाया जा रहा है, जो कि किसी भी विकासशील देश के लिए हानिकारक है।

 

जिन मुद्दों से देश की गरीबी मिटेगी उन मुद्दों पर से ध्यान हटाया जा रहा है: संदीप सांख्यान

 

 

संदीप सांख्यान ने कहा कि वैसे भारत में बेरोजगारी की कहानी जटिल है, जिसमें सरकारी आंकड़ों में वर्तमान में गिरावट दिखती है, साथ मे कौशल की कमी, लैंगिक असमानता और अनौपचारिक रोजगार जैसी गहरी चुनौतियाँ भी उभर कर सामने आई है। जबकि हालिया सरकारी सर्वेक्षणों से बेरोजगारी दर भी बढ़ी है।

 

 

असल मुद्दों की जगह बेमानी मुद्दों पर ध्यान भटका रही है केंद्र सरकार: संदीप सांख्यान

 

संदीप सांख्यान ने कहा कि लोगों के लिए निम्न-गुणवत्ता वाली नौकरियों और असुरक्षित रोजगार की स्थिति से प्रभावित है। बेरोजगारी का मुख्य कारण केंद्र सरकार की नीतियां, युवाओं के प्रति असंवेदनाएं और बेमेल कौशल बल है।

 

 

संदीप सांख्यान ने कहा कि भारतीय कार्यबल के पास औपचारिक कौशल प्रशिक्षण है, जिससे कार्यबल का पूरा उपयोग केंद्र सरकार नहीं कर पा रही है।उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय दबाव भारत की बढ़ती युवा आबादी की तुलना में रोजगार की वृद्धि धीमी है।

 

 

 

जिससे अंतर बढ़ रहा है जिसे केंद्र सरकार संजीदगी से नहीं ले पा रही है और आर्थिक वृद्धि दर पर्याप्त रोजगार सृजन नहीं कर रही है, विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र में और लैंगिक असमानता से शहरी महिलाओं में बेरोजगारी की दर पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक है।

 

 

जो सामाजिक और संरचनात्मक बाधाओं को उजागर करती है उसने भी केंद्र सरकार रोजगार सृजन करने में असफल साबित हुई है। संदीप सांख्यान के कहा कि तकनीकी बदलाव के स्वचालन से और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

 

 

खासकर विनिर्माण, डेटा एंट्री और ग्राहक सेवा क्षेत्रों में, जिसके बारे में भी केंद्र सरकार नीति निर्धारण करने में असफल साबित हो रही है। संदीप सांख्यान ने कहा कि अनौपचारिक और निम्न-गुणवत्ता वाला रोजगार के क्षेत्र में कई लोग अनौपचारिक काम करते हैं, जिसका रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।

 

 

और कई लोगों के पास ऐसी नौकरियाँ हैं जिन्हें निम्न-गुणवत्ता वाली माना जाता है और वे विस्थापन के जोखिम में रहते हैं, ऐसे में केंद्र सरकार वहां भी कोई नीतिगत फैसला नहीं कर पाई है और सरकारी आंकड़े बनाम वास्तविक आंकड़ो में भी रोजगार के आंकड़ो की वास्तविकता कुछ और ही होती है, ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए कि असल मुद्दों पर बात होनी चहिए न कि

विवादित विषयों पर बहस होनी चाहिए।