



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर ज़िले के गांव भगेटू से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाने वाले राजन कुमार ने यह सिद्ध कर दिया कि दिव्यांगता किसी की सीमाएँ तय नहीं करती, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और सेवा-भाव ही व्यक्ति की असली पहचान होती है।

दिव्यांगजनों के अधिकार, स्वाभिमान और सामाजिक मुख्यधारा में उनकी सशक्त भागीदारी के लिए किए गए अतुलनीय कार्यों के लिए उन्हें “दिव्यांगजन स्वाभिमान सम्मान–2025” से सम्मानित किया गया।

यह राष्ट्रीय स्तर का गरिमामय सम्मान वृंदावन की पावन धरा पर गोविंद मठ, गौरी गोपाल गौशाला के सामने, परिक्रमा मार्ग, मथुरा में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया। समारोह में देशभर से आए समाजसेवी, दिव्यांगजन, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति अशोक कुमार जी, उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने कर-कमलों से राजन कुमार को सम्मानित किया। सम्मान प्रदान करते समय पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा और वातावरण भावुक व प्रेरणादायक बन गया।
इस राष्ट्रीय आयोजन का सफल आयोजन एवं संचालन अनाम स्नेह परिवार, प्रयागराज तथा सी.आर.सी., लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसका उद्देश्य देशभर में दिव्यांगजनों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों को पहचान और सम्मान देना रहा।
राजन कुमार विगत कई वर्षों से हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, अधिकार संरक्षण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान के लिए सतत संघर्ष कर रहे हैं। वे न केवल एक सक्रिय समाजसेवी हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के प्रतीक भी हैं। अब तक 15 बार रक्तदान कर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि सेवा का कोई विकल्प नहीं होता।
सम्मान ग्रहण करते समय राजन कुमार भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों दिव्यांगजनों की आवाज़ है, जो सम्मान और अवसर की प्रतीक्षा में हैं। उपस्थित जनसमूह ने खड़े होकर तालियों के साथ उनके संघर्ष, समर्पण और जज़्बे को सलाम किया।
यह उपलब्धि केवल राजन कुमार के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण है। इस आयोजन से दिव्यांगजन न केवल स्वयं आगे बढ़ते हैं, बल्कि समाज को भी नई दिशा देते हैं।
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