



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्याम शर्मा का कहना है कि आज जिला हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में चिट्टा (नशा) के विरुद्ध जागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसमें जिले भर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस रैली के लिए कई कॉलेजों में चल रहे परीक्षा कार्यक्रमों तक में बदलाव किया गया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस अभियान से जुड़ सकें।


लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह रहा कि नशा विरोधी जागरूकता जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर आयोजित इस रैली में ऐसे गीत बजाए गए, जिनका नशे के खिलाफ संदेश से कोई लेना-देना नहीं था।



“अरे दीवानों मुझे पहचानो, मैं हूं डॉन” जैसे गीत बदमाशी, गुंडागर्दी और अपराधी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं, जबकि “आसा खाणी पीणी, मौज मणाणी” जैसे गीत खाने-पीने और मौज-मस्ती की संस्कृति को दर्शाते हैं। ऐसे गीत न तो नशे के दुष्परिणामों को उजागर करते हैं और न ही युवाओं को इससे दूर रहने की प्रेरणा देते हैं।
एक ओर हिमाचल प्रदेश, विशेषकर हमीरपुर जिला, नशे के बढ़ते मामलों से जूझ रहा है और युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है।

दूसरी ओर प्रशासन द्वारा आयोजित जागरूकता रैलियों में इस प्रकार के गीतों का प्रयोग करना अभियान की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इससे नशा विरोधी प्रयासों का मजाक बनता है और युवाओं के बीच गलत संदेश जाता है।
प्रशासन और संबंधित आयोजकों से मांग है कि भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रमों की रूपरेखा सोच-समझकर तैयार की जाए। नशा विरोधी अभियानों में ऐसे गीत, नारे और वक्तव्य शामिल किए जाएं जो वास्तव में युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवन अपनाने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा दें। तभी इस प्रकार के अभियान अपने उद्देश्य में सफल हो सकेंगे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश सरकार व प्रशासन से आग्रह करती है कि प्रदेश सरकार प्रशासन के साथ मिलकर नशा माफिया पर नकेल कसने का काम करें ना कि राजनीतिक मंच तैयार करें।
















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