मनरेगा का नाम बदलने के केंद्र सरकार के निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण: प्रेम कौशल

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- मनरेगा का नाम बदलने के केंद्र सरकार के निर्णय पर खेद प्रकट करते हुए प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मुख्य प्रवक्ता प्रेम कौशल ने मीडिया को जारी एक ब्यान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा शुरू से ही महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना कानून के विरोधी रहे हैं।

 

 

प्रथम बार पद संभालने के उपरांत मनरेगा के विषय में प्रधानमंत्री का संसद में दिया भाषण स्वयंं इसका प्रमाण है!कौशल ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन की रोजगार गारंटी देने वाला यह कानून अपने आप में ऐतिहासिक था।

 

 

जिसके चलते न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले देशवासियों के जीवन स्तर में सुधार हुआ अपितु इस महत्वाकांक्षी योजना ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी क्रांतिकारी योगदान दिया।

 

 

कौशल ने कहा कि इस योजना का नाम बदल कर और 90- 10 के अनुपात में धन उपलब्ध करवाने के स्थान पर 60-40 के अनुपात में इस योजना को लागू करने के निर्णय ने इस तथ्य को पूर्ण रूप से उजागर कर दिया कि अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार की मंशा इस योजना को बंद करने की है क्योंकि आर्थिक तंगहाली और क़र्ज़ के बोझ से जूझती प्रदेश सरकारें इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 40% के अनुपात में धन उपलब्ध करवाने में समर्थ नहीं होंगी!कौशल ने आरोप लगाया कि भाजपा और केंद्र सरकार की तमाम नीतियां देश की ग़रीब और जरूरतमंद जनता के हितों के ख़िलाफ़ हैं।