



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जिला कमेटी हमीरपुर ने पार्टी के अखिल भारतीय आह्वान पर मनरेगा के कानून को बदलने के विरोध में सचिवालय पर धरना प्रदर्शन किया और जिलाधीश के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा l

उल्लेखनीय है बीते दिनों मोदी सरकार ने देश की संसद में बिना किसी पूर्व सूचना के मनरेगा के कानून को बदलने के लिए कानून पेश कर दिया और मनमाने ढंग से पारित कर दिया l वर्ष 2005 वामपंथी पार्टियों के सहयोग से चलने वाली मनमोहन सिंह की सरकार ने गांव के लोगों के लिए न्यूनतम आजीविका का सहारा मनरेगा के रूप में देश के लिए अर्पित किया था l



मनरेगा कानून ना केवल देश के करोड़ों लोगों को रोजगार देता था बल्कि गांव के स्वशासन के जरिए गांव के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण कारक बना था l इससे पंचायती राज संस्थाओं को भी मजबूती मिली थी और गांव के विकास में जनभागीदारी भी कायम हो रही थी l




मोदी सरकार वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद इसे कमजोर करने के लिए लगातार बजट में कटौती कर रही थी परंतु मनरेगा को समाप्त नहीं कर सकी l खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मनरेगा कानून का मज़ाक उड़ाते हुए इसे कॉंग्रेस की नाकामियों का स्मारक घोषित कर चुके थे l
मनरेगा का कानून प्रत्येक परिवार को 100 दिन रोजगार की गारंटी देता था l मनरेगा का काम मांग पर आधारित था l मनरेगा में न्यूनतम वेतन की गारंटी थी l मनरेगा के काम पंचायत को तय करने की गारंटी थी l

मनरेगा रोजी-रोटी की गारंटी थी और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के साथ साथ सामाजिक स्थिति में भी सुधार में मदद मिली l परंतु अब इसके स्थान पर विकसित भारत जी राम जी बिल में इसे रोजगार और आजीविका मिशन के तौर पर प्रस्तुत किया गया है l
जिसमें केंद्र की सौ प्रतिशत हिस्सेदारी के स्थान पर अब साथ प्रतिशत और राज्यों के लिए चालीस प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की गयी है जबकि राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पहले ही बहुत खराब है खुद के कर्मचारियों और पेंशन धारकों की अदायगी भी बड़ी मुश्किल से हो रही है ऐसी स्थिति में राज्य इसे नहीं चला पाएंगे l
भारत सरकार ने इस योजना में मांग आधारित रोजगार को ही नकार दिया है l गांव में क्या काम होंगे इसे स्थानीय पंचायतों के बजाय केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाएगा l
इस योजना में फसल सीजन के दौरान 60 दिनों के लिए रोजगार नहीं दिया जाएगा जिसका मकसद है कि गांव के भूमिहीनों को रोजगार के अभाव में बड़ी भूमि के मालिकों के पास काम के लिए मजबूर किया जा सके l

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी इसका विरोध करती है और मनरेगा के कानून को बहाल करने की मांग करती है l आज के प्रदर्शन में पार्टी के राज्य सचिवालय सदस्य डॉ कश्मीर ठाकुर, जिला सचिव प्रताप राणा, जोगिंदर कुमार, रंजन शर्मा, संतोष कुमार, ब्रह्म दास, कमल सिंह, नवीन, किरण, संदली रेखा आदि ने भाग लिया l















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