सर्व टीजीटी महासंघ का भोटा में हुआ सफल महासम्मेलन

भोटा/हमीरपुर:-  हिमाचल प्रदेश सर्वे टीजीटी महासंघ का महासम्मेलन 2 तारीख को भोटा में आयोजित किया गया जिसमें लगभग 1015 के करीब प्रशिक्षित स्नातक अध्यापकों ने भाग लिया और इस आयोजन को सफल बनाया।

 

इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सभी टीजीटी साथियों को एक मंच पर लाना था और सर्व टीजीटी महासंघ की कार्यकारिणी का गठन करना था।

 

कार्यकारिणी के गठन में मंडी से सुनील ठाकुर को सर्व सहमति से प्रधान नियुक्त किया गया वरिष्ठ उप प्रधान राजीव सेरिया कांगड़ा से, राकेश धीमान ऊना , बिरि सिंह कुल्लू, राकेश धीमान ऊना, यशपाल बिलासपुर व प्रमिला ठाकुर मंडी से . सह सचिव के लिए मनु देव शर्मा हमीरपुर से, रमन कांत सिंह कांगड़ा से, मोहिंदर सिरमौर, कमलेश लाहौल स्पीति, दर्शन सिंह ऊना, कोषाध्यक्ष संजय कुमार हमीरपुर , प्रेस सचिव विनोद राजपूत चंबा, अविनाश सैनी मंडी व अनिल कुमार मंडी को चुना गया. संघ के मुख्य संरक्षक मंडी से श्री योगेश शर्मा को दिया गया।हमीरपुर से सुनील शर्मा को सर्व सहमति से

महासचिव चुना गया।हिमाचल प्रदेश सर्व टीजीटी महासंघ
मांग-पत्र (डिमांड चार्टर)

अपने ध्येय वाक्य “निष्ठावान अध्यापन- संघर्ष से अधिकार” से आगे बढ़ते हुए शिक्षा व्यवस्था की मजबूती, शिक्षक सम्मान की रक्षा तथा टीजीटी वर्ग के न्यायसंगत अधिकारों की प्राप्ति हेतु हिमाचल प्रदेश सर्व टीजीटी महासंघ निम्नलिखित प्रमुख मांगें सरकार व शिक्षा विभाग के समक्ष रखता है—

1. टीजीटी अध्यापकों की न्यूनतम बेसिक पे पंजाब के छठे वेतनमान आयोग के अनुरूप ₹45,400 निर्धारित कर उसे शीघ्र लागू किया जाए। 3 जनवरी 2022 के बाद नियुक्त टीजीटी साथियों को पंजाब की तर्ज पर 44900 कार इनिशियल स्टार्ट दिया जाए ।
2. टीजीटी संवर्ग के लिए 4-9-14 एसीपी व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाए।
3. 2024 में अनुबंध पर लगाए गए सभी टीजीटी को पूर्व की व्यवस्था अनुसार साल में दो बार साल में दो बार सितंबर तथा मार्च में नियमित किया जाए ।
4. कर्मचारी सेवा अधिनियम- 2024 को निरस्त किया जाए और अनुबंध सेवा के लिए नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया जाए।
4. अनुबंध कार्यकाल के समस्त वित्तीय लाभ नियमित सेवा एवं पेंशन लाभों के लिए जोड़े जाएँ ।
5. 3 जनवरी 2022 के बाद नियुक्त सभी अध्यापक साथियों को उच्च वेतनमान का लाभ दिया जाए।
6. अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त किया जाए ताकि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर ध्यान दे सकें।
7. टीजीटी अध्यापकों के कार्यभार का युक्तिसंगत संतुलन सुनिश्चित किया जाए।
8. 2019 के बाद नियमित हुए टीजीटी अध्यापकों की वरिष्ठता सूची शीघ्र जारी की जाए एवं वरिष्ठता सूची जारी करने की प्रक्रिया प्रतिवर्ष नियमित रूप से जारी की जाए ।
9. टीजीटी से प्रवक्ता व मुख्य अध्यापक पदों पर पदोन्नति नियमित व समयबद्ध रूप से वर्ष में दो बार की जाए।
10. टीजीटी से प्रवक्ता व मुख्य अध्यापक पद पर पदोन्नति हेतु विकल्प चुनने की 26-04-2010 की शर्त समाप्त की जाए।
11. कार्यरत टीजीटी वर्ग से मुख्य अध्यापक व प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति के लिए आयोग द्वारा परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रावधानों के अनुरूप किया जाए।
12. राजकीय माध्यमिक पाठशालाओं में मुख्य अध्यापक के पदों का सृजन किया जाए।
13. विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को निरंतर ऊँचा उठाने हेतु समय-समय पर शिक्षा विभाग व सरकार के समक्ष उचित नीतिगत मांगें रखने के लिए इस संगठन को उचित मंच प्रदान किया जाए।
14. हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को और अधिक सशक्त, पारदर्शी व प्रभावशाली बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
इसके अलावा सर्व टीजीटी महासंघ का संविधान भी आमसभा में उपस्थित सभी टीजीटी अध्यापकों के अनुमोदन के साथ पारित किया गया। कार्यकारिणी का गठन आगामी 3 वर्षों के लिए किया गया तथा कार्यकारिणी को अधिकृत किया गया कि राज्य के विभिन्न जिलों तथा विभिन्न शिक्षा करो में अगले तीन वर्षों के लिए कार्यकारिणियों का गठन किया जाएगा l

कार्यक्रम में महासंघ की तरफ से सेवानिवृत प्रधानाचार्य जय गोपाल शर्मा जी को अवसर पर लगाया था। शिक्षा विभाग की तरफ से श्री राजेश गौतम जिला विज्ञान पर्यवेक्षक हमीरपुर को पर्यवेक्षक लगाया था l कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अकादमिक डायरेक्टर 7 स्टार इंटरनेशनल स्कूल भोटा श्री केएस गुलेरिया तथा विशिष्ट अतिथि 7 स्टार इंटरनेशनल स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री संदीप कंवर रहे l
यूनियन का संविधान बनाते हुए यह तय किया गया कि यूनियन की मेंबरशिप फीस का एक प्रतिशत खर्च प्रदेश में निर्धन बच्चों की शिक्षा पर व्यय किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह तय किया गया कि यूनियन के पदाधिकारी टीजीटी वर्ग से ही हमेशा के लिए रहेंगे । पदोन्नत टीजीटी यदि वह प्रवक्ता या मुख्य अध्यापक बन जाते हैं तो महासंघ के पदाधिकारी नहीं बन सकते l यह भी तय किया गया कि महासंघ का पदाधिकारी दो बार से अधिक राज्य स्तरीय कार्यकारिणी का सदस्य नहीं बन सकता । यह भी निर्धारित किया गया कि यूनियन पूरी तरह से गैर राजनीतिक रहेगी तथा सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत यूनियन का रजिस्ट्रेशन करवाया जाएगा l इस मौके पर यूनियन के सीनियर अधिवक्ता नीरज शाश्वत जी भी उपलब्ध रहे l