



बद्दी/विवेकानंद वशिष्ठ :- भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) हिमाचल प्रदेश के राज्य मीडिया सह प्रभारी ठाकुर निशांत सिंह ने बद्दी से जारी एक विस्तृत बयान में कांगड़ा की बेटी पल्लवी के दुखद निधन को प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ‘काला अध्याय’ करार दिया है।
“जब न्याय के लिए संघर्ष और इलाज के लिए भटकना ही नियति बन जाए, तो यह ‘सुव्यवस्था’ नहीं, ‘कुप्रबंधन’ है।”


उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास पर गहरा आघात है जो एक आम नागरिक अपनी चुनी हुई सरकार और प्रशासन पर रखता है।



रामपुर से कांगड़ा तक लचर स्वास्थ्य सेवाएं और प्रशासनिक उदासीनता प्रदेश के लिए चिंता का विषय।”
प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर प्रश्न ठाकुर निशांत सिंह ने कहा, “एक सभ्य समाज में कानून का शासन और प्रशासन की तत्परता सर्वोपरि होती है। पल्लवी प्रकरण में जिस प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता और पुलिसिया लापरवाही के आरोप सामने आए हैं, वे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

माननीय उच्च न्यायालय की टिप्पणियां सरकार के लिए ‘आत्मचिंतन’ का विषय होनी चाहिए।”
जब एक पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाता है और उसे सहयोग के बजाय उदासीनता मिलती है, तो यह ‘सिस्टम’ की विफलता को दर्शाता है। हम स्पष्ट मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून का चाबुक उस पर चलना चाहिए ताकि जनमानस में न्याय के प्रति भरोसा कायम रह सके।”
स्वास्थ्य सेवाओं का ‘रेफरल सेंटर’ में तब्दील होना
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए ठाकुर निशांत सिंह ने कहा कि कांगड़ा की घटना को हम रामपुर के कुहल और तकलेच की हालिया घटनाओं से अलग करके नहीं देख सकते।
उन्होंने कहा, “प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अब इलाज के केंद्र नहीं, बल्कि महज ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह गए हैं। 21वीं सदी के भारत में, जहां केंद्र सरकार एम्स (AIIMS) और मेडिकल कॉलेजों का जाल बिछा रही है, वहीं हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के अभाव में किसी की जान जाना राज्य सरकार की प्रबंधन क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”

न्यायपालिका की चिंता और सरकार का दायित्व
उन्होंने आगे जोड़ा कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर की गई तल्ख टिप्पणियां सरकार के लिए आईना दिखाने के समान हैं। “न्यायपालिका जब जनहित के मुद्दों पर हस्तक्षेप करती है।
तो यह सरकार के लिए ‘आत्ममंथन’ का विषय होना चाहिए, न कि उपेक्षा का। सरकार को यह समझना होगा कि स्वास्थ्य और सुरक्षा जनता का मौलिक अधिकार है, कोई चुनावी वायदा नहीं।”
निष्कर्ष और मांग
ठाकुर निशांत सिंह ने अंत में कहा कि हम इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना के साथ खड़े हैं। भाजयुमो मांग करता है कि सरकार तत्काल प्रभाव से:
पल्लवी मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दे।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की रिक्तियों पर ‘श्वेत पत्र’ जारी कर उन्हें भरने की समयसीमा तय करे।
प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा, “जनता सब देख रही है। हम सरकार से अपील करते हैं कि वे संवेदनशीलता का परिचय दें और ऐसी ठोस व्यवस्था बनाएं कि भविष्य में किसी और बेटी को पल्लवी जैसी नियति का सामना न करना पड़े।”















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