बीपीएल के नए मापदंड गरीबों के साथ अन्याय, सरकार तुरंत करे पुनर्विचार – उषा बिरला

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- दडूही ग्राम पंचायत की प्रधान उषा बिरला ने हिमाचल प्रदेश सरकार का ध्यान पंचायतों से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करवाया है। उन्होंने कहा कि वे वर्ष 2011 से लगातार तीसरी बार ग्राम पंचायत दडूही की प्रधान के रूप में पंचायत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, लेकिन वर्तमान कार्यकाल में पंचायतों को जिन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

 

पंचायतों का मानदेय रोका, मजदूरों का भुगतान अटका, सरकार कर रही सौतेला व्यवहार – उषा बिरला

 

प्रधान उषा बिरला ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बीपीएल चयन के लिए नए मापदंड लागू किए जाने से बड़ी संख्या में वास्तविक गरीब परिवार बीपीएल सूची से बाहर हो गए हैं। बीपीएल से बाहर होने के कारण ये परिवार केंद्र एवं राज्य सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हो गए हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि इससे पूर्व बीपीएल चयन का अधिकार ग्राम सभाओं को प्राप्त था। ग्राम सभा एक संवैधानिक संस्था है, जिसे भली-भांति यह ज्ञात होता है कि कौन परिवार बीपीएल के लिए पात्र है और कौन नहीं। अतः बीपीएल चयन का अधिकार पुनः ग्राम सभाओं को दिया जाना चाहिए।

 

 

उषा बिरला ने बताया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति बहुल पंचायतों को 20 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई थी, जिसमें ग्राम पंचायत दडूही भी शामिल है।

 

पंचायत द्वारा इस राशि से सभी विकास कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, लेकिन हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत के खाते से 5 लाख रुपये की राशि वापस ले ली गई, जिससे ठेकेदारों एवं मजदूरों का भुगतान रुक गया है। पंचायत पर लगातार भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि पंचायत का कार्यकाल भी शीघ्र समाप्त होने वाला है।

 

 

उन्होंने आगे कहा कि हमीरपुर जिला की 17 पंचायतों को लोगों के विरोध के बावजूद नगर निगम में शामिल कर दिया गया, जिसके चलते वर्ष 2025-26 के लिए मनरेगा शेल्फ स्वीकृत नहीं किया गया तथा वर्ष 2026-27 के लिए भी मनरेगा की कोई रूपरेखा तैयार नहीं की गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार से वंचित होना पड़ रहा है।

 

 

प्रधान उषा बिरला ने सरकार पर आरोप लगाया कि एक ओर विधायकों को नियमित रूप से हर माह मानदेय दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का मानदेय पिछले छह महीनों से रोका गया है। यह पंचायती राज संस्थाओं के साथ सौतेला व्यवहार है, जिसे किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

 

 

उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश से मांग की कि

बीपीएल चयन के लिए लागू किए गए नए मापदंडों को तुरंत हटाया जाए और अधिकार पुनः ग्राम सभाओं को दिए जाएं।

 

 

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत पंचायत से वापस ली गई राशि तुरंत पंचायत के खाते में लौटाई जाए, ताकि समय रहते मजदूरों व ठेकेदारों का भुगतान किया जा सके।

 

नगर निगम में शामिल की गई पंचायतों को मनरेगा शेल्फ में विशेष छूट प्रदान की जाए।

पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का लंबित मानदेय तुरंत जारी किया जाए।

 

उषा बिरला ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की नींव हैं और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार प्रदेश के ग्रामीण विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।