



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- देश में रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों की समस्या अब राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। यह विषय किसी धर्म या राजनीति का नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा, जनसांख्यिकीय संतुलन और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
देवभूमि की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़: सोम दत्त


वर्ष 2024–25 के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार



दिल्ली में 2000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को चिन्हित कर डिपोर्ट किया गया।
असम, गुजरात और राजस्थान में विशेष अभियानों के तहत हजारों अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई हुई, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट किया जाए।

पड़ोसी राज्य सक्रिय, हिमाचल सुस्त क्यों?
हिमाचल से सटे उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त और निरंतर अभियान चल रहे हैं। उत्तराखंड में अवैध बसावट हटाने और फर्जी दस्तावेजों की जांच के लिए विशेष ड्राइव इसका उदाहरण हैं।
इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश में सरकार अपने ही राजनीतिक ताने-बाने, आपसी खींचतान और सत्ता के आंतरिक संघर्षों में उलझी हुई नजर आती है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि अवैध बसावट, भूमि कब्जे और फर्जी दस्तावेजों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
अवैध निर्माण सरकार की विफलता का प्रमाण

शिमला की संजौली मस्जिद को अवैध घोषित कर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर दिसंबर 2025 से उसकी ऊपरी मंजिलों को गिराया जाना यह दर्शाता है कि
अवैध निर्माण रातों-रात नहीं होते, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण और राजनीतिक चुप्पी से पनपते हैं।
यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब निर्माण हो रहा था, तब प्रशासन और सरकार क्या कर रही थी?
सरकार की चुप्पी पर गंभीर सवाल हिमाचल में अवैध प्रवासियों की राज्य-व्यापी पहचान ड्राइव क्यों नहीं?
फर्जी आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड बनाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं? भूमि कब्जों और अवैध कॉलोनियों पर सख्त बुलडोजर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या सरकार वोट बैंक की राजनीति के डर से कानून लागू करने से बच रही है? यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो देवभूमि हिमाचल की शांति, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सौहार्द को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
हिमाचल सरकार को तत्काल ये कदम उठाने चाहिए
पूरे प्रदेश में विशेष पहचान एवं सत्यापन अभियान चलाया जाए फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो अवैध निर्माण और भूमि कब्जों पर बिना भेदभाव कार्रवाई की जाए केंद्र एजेंसियों के साथ समन्वय कर डिपोर्टेशन प्रक्रिया तेज़ की जाए।
हिमाचल की जनता से अपील प्रदेश की जनता से भी आग्रह है कि बिना वैध दस्तावेजों वाले लोगों को किराए पर मकान या रोजगार न दें, लालच या दबाव में आकर ऐसे कार्य न करें जो भविष्य में बड़े संकट का कारण बनें,
धर्म और जाति से ऊपर उठकर अपनी धरती और पहचान की रक्षा के लिए एकजुट रहें।
यह कोई डर फैलाने वाला बयान नहीं, बल्कि समय रहते चेतावनी है। यदि आज सरकार नहीं जागी, तो कल जनता को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।















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