



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के कार्यकाल में आम जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। सरकार के दावों के विपरीत सच्चाई यह है कि “सुख की सरकार” ने जनता को सुख नहीं, केवल दुख दिया है।
प्रदेश में जनता द्वारा चुने गए विधायकों की विकास निधि को रोककर सरकार ने छोटे-छोटे लेकिन अत्यंत आवश्यक विकास कार्यों पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। गांव-गांव में सड़कें, नालियां, पेयजल योजनाएं, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन जैसे जरूरी कार्य ठप पड़े हैं।
विधायक निधि, जो सीधे जनता की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी होती है, उसे रोककर सरकार अपने मनमाने फैसले थोप रही है।

एक ओर जनता के काम रोक दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार मंडी में अपने तथाकथित “तीन साल के कार्यकाल” का जश्न मनाने और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च करने में जुटी है। सरकार की प्राथमिकता साफ है — जनता नहीं, जश्न और प्रचार।
इतना ही नहीं, पिछली भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई सहारा योजना पिछले छह महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी है। इस योजना के सहारे इलाज करवा रहे हजारों गंभीर बीमार मरीजों का उपचार अधर में लटक गया है।
कैंसर, किडनी फेलियर, पैरालिसिस, हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज दवाइयों के बिना तड़प रहे हैं, लेकिन सरकार की संवेदनहीनता का आलम यह है कि न कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही कोई जवाब दिया जा रहा है।
पिछली सरकार की हिम केयर (HIMCARE) सहित अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं, जो गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवनदान साबित हुई थीं, उन्हें भी यह सरकार सुचारू रूप से चलाने में पूरी तरह विफल रही है।
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जहां जनता के छोटे जरूरी कामों और मरीजों के इलाज के लिए धन नहीं है, वहीं सरकार अपने मंत्रियों और चहेतों के कंफर्ट, आयोजनों और प्रचार पर खुले दिल से खर्च कर रही है।
प्रदेश की जनता आज पूछ रही है कि जब विधायक निधि से होने वाले छोटे विकास कार्य रुक गए हैं और गंभीर बीमार मरीज इलाज के बिना तड़प रहे हैं, तो सरकार किस उपलब्धि का जश्न मना रही है?
हिमाचल की जागरूक जनता इस जनविरोधी सोच को भली-भांति समझ चुकी है और समय आने पर इसका करारा जवाब जरूर देगी।
Post Views: 122



















Total Users : 122730
Total views : 185593