



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रमुख प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह राणा ने आज प्रेस बयान जारी करते हुए कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला।
राजेंद्र सिंह राणा ने सुक्खू सरकार पर हमला



उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) को लेकर राज्य सरकार का लगातार शोर पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और राजनीतिक है, जबकि यह पहले से ही स्पष्ट रूप से अधिसूचित था कि 16वें वित्त आयोग के निर्णय के बाद यह अनुदान चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो जाएगा।



राज्य को कर्ज के दलदल में धकेलने के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू जिम्मेदार – राजेंद्र सिंह राणा

राणा ने कहा कि यह जानकारी मुख्यमंत्री और उनके पूरे प्रशासनिक तंत्र को पहले से थी, फिर भी राज्य को वित्तीय अनुशासन में लाने के बजाय मनमाने खर्चों की नीति अपनाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रदेश की महिलाएं आज भी 1500 रुपये मासिक सम्मान राशि का इंतजार कर रही हैं, उसी समय मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के मानदेय को 3,000 रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंचा दिया गया, जो हिमाचल के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला जैसा निर्णय है और करदाताओं के साथ सीधा अन्याय है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने कार्यकाल में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लेकर प्रदेश के हर नागरिक पर लगभग दो लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
राणा ने यह भी कहा कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब राज्य की तिजोरी आम जनता और अधिकांश ठेकेदारों के लिए बंद हो गई है, जबकि मुख्यमंत्री के निकट ठेकेदारों के लिए भुगतान चंद पलों में हो जाता है। इसके कारण राज्य पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी खड़ी हो चुकी है।
राणा ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि का उपयोग वेतन और पेंशन भुगतान में किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि केंद्र पर आरोप लगाने से पहले मुख्यमंत्री को खर्च किए गए धन का उपयोगिता प्रमाण पत्र सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि जब चौदहवें और पंद्रहवें वित्त आयोग में स्पष्ट लिखा था कि वित्तीय घाटा अनुदान बंद होगा, तो हिमाचल को कर्ज और संकट की खाई में क्यों धकेला गया; जब यह जानकारी मुख्यमंत्री और उनके तंत्र को पहले से थी तो आज मासूमियत क्यों दिखाई जा रही है।
क्या यही सुक्खू सरकार का आर्थिक मॉडल है कि प्रदेश की तिजोरी आम जनता के लिए बंद और चहेतों के लिए कुछ पलों में खुल जाती है; केंद्र सरकार लगातार सहायता दे रही है फिर भी जनता वेतन, पेंशन और योजनाओं के लिए तरस रही है तो पैसा आखिर जा कहां रहा है।
क्या जनता के धन से मित्रों को लाभ और जनता को केवल भाषण देना ही सरकार की जवाबदेही है और अंततः हिमाचल की तिजोरी सरकार चला रही है या मित्र मंडली।















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