नादौन उपमंडल के 11 स्कूलों में पढ़ाया जाएगा सीबीएसई पाठ्यक्रम

नादौन/हमीरपुर:-   नादौन उपमंडल के 11 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। रैल व जलाड़ी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी सीबीएसई होंगे। धनेटा, नादौन बॉयज व गर्ल्स, बदारन, अमलैहड़, बड़ा, बटराण, कांगू व गलोड़ स्कूल पहले ही सीबीएसई से संबद्ध हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू जी ने स्कूल शिक्षा विभाग को रैल व जलाड़ी स्कूल को भी सीबीएसई से संबद्ध करने की औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

रैल व जलाड़ी स्कूल भी सीबीएसई होंगे, नौ पहले हो चुके

 

अमलैहड़ में निर्माणाधीन डे बोर्डिंग स्कूल को भी नए शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दिया जाएगा। यह शिक्षा के क्षेत्र में पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बनेगा। चूंकि, अन्य स्थानों पर भी निर्माणाधीन डे बोर्डिंग स्कूलों का कार्य भी तेज गति से चल रहा है।

अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई की पढ़ाई होगी

इन स्कूलों में अप्रैल-2026 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय शिक्षा के साथ सुविधाएं भी अव्वल दर्जे की मिलेंगी। विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मुहैया कराने के साथ खेलों में भी पारंगत बनाया जाएगा। इन स्कूलों के अपने खेल मैदान होंगे।

 

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू जी ने उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए भवनों की उचित व्यवस्था करें। जहां भवन निर्माण की जरूरत है, वहां पुराने भवनों के स्थान पर नई बहुमंजिला इमारत बनाई जाएं। साथ ही स्कूलों को सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र से 140 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होगा। 100 स्कूल अब तक सीबीएसई से संबद्ध हो चुके हैं, जबकि 40 स्कूलों की संबद्धता संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

 

मुख्यमंत्री का लक्ष्य पूरे प्रदेश में 200 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करना है। इन स्कूलों का अलग लोगो व यूनिफॉर्म होगा। भवनों का रंग भी एक जैसा ही रहेगा।

 

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह जी चाहते हैं कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थी सीबीएसई की भी पढ़ाई करें। इससे उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ेगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी हासिल होगी।

 

शहरी के साथ ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में भी सीबीएसई की पढ़ाई होना हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक क्रांतिकारी बदलाव है।