



हिमाचल/विवेकानंद वशिष्ठ :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लांचिंग जब प्रधानमंत्री के तौर पर हो रही थी तो भाजपा का सोशिल मीडिया खेल उसी समय से शुरू हो गया था, स्मरण होना चाहिए कि थ्री-डी रैलियों में जनता को जिस प्रकार बेवकूफ बनाया गया, वह सिलसिला आज दिन तक बदस्तूर जारी है।
उस समय भाजपा का यह निजी स्वार्थ था, जिसमें जनता को भ्रमित करने में वे कामयाब हो गए। लेकिन अब सोशिल मीडिया का यह लालच देश के लिए घातक साबित हो रहा है। देश में फैल रहे नफरती माहौल में भाजपा के सोशिल मीडिया विंग पर यदि समय रहते अंकुश न लगाया गया।
तो देश को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। प्रैस को जारी बयान में यह बात प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कोऑर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कही। उन्होंने कहा कि डिजीटल इंडिया के इस दौर में इस प्रकार की भ्रामक एवं तर्कहीन मेटेरियल गाहे बगाहे व्यक्तिगत से लेकर सार्वजनिक तौर पर अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं।
इसका साफ उदाहरण विंटर कार्निवाल शिमला में जिस तरह से प्रदेश के मुख्यमंत्री की तस्वीर सोशल मीडिया पर डाली गई और उस पर भाजपा के पदाधिकारियों ने टिप्पणी की बहुत खेदजनक विषय है। उन्होंने कहा कि देश के बड़े राज्यों में इस प्रकार की घटनाएं आम है तथा इनके पीछे सोशिल मीडिया की यही भ्रामक पोस्ट आग में घी का काम कर रही हैं, जिन पर रोक लगना लाजमी हो गया है।
संदीप सांख्यान ने कहा है कि भाजपा और आरएसएस सोशल मीडिया विभागों, विंगों व सेल आदि ने देश व प्रदेश की राजनीति के स्तर को रसातल तक पहुंचा दिया है। जिसे किसी भी तरह की स्वस्थ राजनीति के लिए सही नहीं ठहराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार काबिज हुई थी तब से लेकर अब तक भाजपा का सोशल मीडिया कांग्रेस नेताओं पर चरित्र हनन की टिप्पणियां करता आ रहा है, जबकि आरएसएस और इनकी सहयोगी संगठन भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह कांग्रेस नेताओं के प्रति चरित्र हनन की राजनीति में शामिल है।
संदीप सांख्यान ने यह भी कहा कहा कि कुछ समय तक सोशल मीडिया के माध्यम से लोग भ्रमित तो हो सकते हैं लेकिन कुछ समय के बाद जब सच्चाई लोंगो के समक्ष आएगी तब तक भाजपा और आरएसएस देश का काफी नुकसान कर चुके होंगे।
उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में भाजपा और आरएसएस जो विचार व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी या फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया साइटों के माध्यम लोंगो को भ्रमित करने के लिए प्रेषित कर रहे उसमें अर्थ का अनर्थ, इतिहास, समाजशास्त्र, भूगोल शास्त्र, अर्थ शास्त्र, व्यवहार शास्त्र सब कुछ ही गायब हो रहा है, जो देश, प्रदेश या किसी भी राजनीतिक दल, संगठन, सामाजिक दल, धार्मिक दल के लिए घातक है।
संदीप सांख्यान के व्हाट्सएप और फेसबुक या सोशल मीडिया में भ्रामक प्रचार.प्रसार की जननी भाजपा और आरएसएस के वह विंग्स है जिन्हें कांग्रेस के नेताओं या बुद्धिजीवी वर्ग का चरित्र हनन करने के लिए विशेष तौर पर वर्णित किया जा रहा है। केंद्र सरकार को इस गंभीर विषय को लेकर न सिर्फ मंथन करना चाहिए बल्कि सख्त कानून भी बनाना चाहिए।
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