



शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :- सफाई मजदूरों को चार महीने से वेतन न मिलने व सुरक्षा कर्मियों को नौकरी से निकालने के खिलाफ सीटू जिला कमेटी शिमला ने आयुर्वेदिक अस्पताल छोटा शिमला में जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला कोषाध्यक्ष बालक राम, जिला सचिव हिमी देवी, विवेक कश्यप, दलीप सिंह, कपिल नेगी, श्याम दिप्टा, संजय सामटा, धनेश, अमित, सूरज सहित कई लोग शामिल रहे।


प्रदर्शन के बाद सीटू प्रतिनिधिमंडल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से मिला व मजदूरों का वेतन तुरंत जारी करने व नौकरी से निकाले गए सुरक्षा कर्मियों की नौकरी बहाल करने की मांग की।



सीटू ने चेताया है कि अगर शीघ्र ही ये मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन तेज होगा। मजदूर हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे व अस्पताल में सफाई व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाएं ठप्प कर दी जाएंगी।
प्रदर्शन को विजेंद्र मेहरा, बालक राम व विवेक कश्यप ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक अस्पताल के मजदूरों पर बंधुआ मजदूरी व गुलामी थोपी जा रही है। मजदूरों को चार महीने से वेतन नहीं दिया गया है। ये गरीब मजदूर वेतन के अभाव में कैसे अपना व अपने परिवार का गुजारा करेंगे। मजदूरों ने श्रम कानूनों को लागू करवाने के लिए श्रम कार्यालय शिमला में विवाद उठाया था परंतु आठ महीने से श्रम अधिकारी घोड़े बेचकर सोए हुए हैं। श्रम अधिकारियों द्वारा वेतन भुगतान अधिनियम 1936 की अवहेलना पर ठेकेदारों व अस्पताल प्रबंधन पर कोई कार्रवाई न करना बताता है कि ये अधिकारी भी ठेकेदारों से मिले हुए हैं व मजदूरों का गला घोंट रहे हैं। अस्पताल में मजदूरों को अर्जित, आकस्मिक, मेडिकल, त्यौहार व राष्ट्रीय अवकाश सहित कोई छुट्टी नहीं दी जा रही है। मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश तक नहीं मिल रहा है। वर्षों से कार्यरत मजदूरों को पहचान पत्र तक जारी नहीं किया गया है जोकि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के कानून के तहत नौकरी लगने के तीन दिन के भीतर देना अनिवार्य है। उन्हें सैलरी स्लिप नहीं दी जाती। उनसे अपने कार्य के अलावा कई तरह के अतिरिक्त कार्य करवाए जाते हैं परंतु उसका कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता है। यह प्रदेश सरकार सचिवालय व श्रमायुक्त कार्यालय हिमाचल प्रदेश की नाक तले अंधेरे जैसी स्थिति है। इस अस्पताल में जंगल राज चल रहा है जहां किसी भी श्रम कानून की पालना नहीं की जाती हॉल मजदूरों को साल में मिलने वाली दो वर्दी से भी वंचित रखा गया है। उनके ईपीएफ का रखरखाव भी उचित नहीं है। मजदूरों को ईएसआई सुविधा से भी वंचित रखा गया है। इस तरह इन श्रम कानूनों की अवहेलना पर पिछले आठ महीने की श्रम कार्यालय की कार्रवाई भी संदेहास्पद है। उन्होंने चेताया है कि अगर शीघ्र ही श्रम कानून लागू न हुए तो मजदूर हड़ताल पर चले जाएंगे।

















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