क्लाउड बर्स्ट की घटनाएँ के लिए कौन है, जिम्मेदार: सजल अवस्थी

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ  :-   हिमाचल प्रदेश में क्लाउड बर्स्ट की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जो जन-जीवन, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गई हैं। क्लाउड बर्स्ट क्या है और इसके कारण क्या हैं?

 

क्लाउड बर्स्ट क्या है……?

 

क्लाउड बर्स्ट एक प्रकार की प्राकृतिक आपदा है, जिसमें वायुमंडल में नमी से भरे बादल किसी पहाड़ी क्षेत्र में अचानक फट पड़ते हैं और बहुत ही कम समय में अत्यधिक बारिश होती है। यह बारिश सामान्य वर्षा की तुलना में कई गुना अधिक होती है, जिससे अचानक बाढ़, भूस्खलन और जान-माल की भारी क्षति होती है।

 

कारण:-

 

1. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग

2. वनों की अंधाधुंध कटाई

3. अनियंत्रित और असुरक्षित निर्माण कार्य

4. वायुमंडलीय दबाव और तापमान में असामान्य बदलाव

5. प्राकृतिक जलमार्गों का अवरुद्ध होना

 

नियंत्रण के उपाय:-

 

1. अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और समय पर चेतावनी व्यवस्था विकसित करना।

2. वृक्षारोपण और वनों का संरक्षण करना।

3. केवल सुरक्षित व वैज्ञानिक निर्माण की अनुमति देना और अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाना।

4. नालों व जलमार्गों को खुला रखना ताकि पानी का बहाव बाधित न हो।

5. आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत बनाना।

 

लोगों की भूमिका:-

 

1. स्थानीय लोग अवैज्ञानिक निर्माण का विरोध करें और जागरूकता अभियान चलाएँ।

2. अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें।

3. मानसून के समय जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।

4. सरकार और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें।

5. युवा वर्ग सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों से सुरक्षा संदेश फैलाएँ।

 

अंतरराष्ट्रीय मॉडल से सबक:-

 

1. जापान से अत्याधुनिक पूर्वानुमान तकनीक और जन-प्रशिक्षण।

2. स्विट्ज़रलैंड से निर्माण नियंत्रण और आपदा चेतावनी प्रणाली।

3. नॉर्वे से सतत पर्यटन नीति और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा।

 

निष्कर्ष:-

 

हिमाचल प्रदेश को क्लाउड बर्स्ट से बचाने के लिए इन तीनों देशों के मॉडल का संयोजन सबसे उपयुक्त है। जापान की तकनीक, स्विट्ज़रलैंड का अनुशासन और नॉर्वे की पर्यावरणीय नीति मिलकर ही एक ऐसा ढांचा तैयार कर सकते हैं, जिससे हिमाचल की प्राकृतिक धरोहर, जन-जीवन और पर्यटन सभी सुरक्षित रह सकें। यह समय है कि सरकार, विशेषज्ञ और आम जनता मिलकर सामूहिक प्रयास करें।