



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ की बैठक डॉ राजेश राणा अध्यक्ष हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस वार्ता में प्रदेश के राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य एवं विभिन्न जिला के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
हमीरपुर मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह डोगरा महासचिव डॉ वैंकतेश्वर् सिंह रनौत ने हमीरपुर संघ की तरफ से कडा विरोध जताया है और कहा हाल ही में चंबा के नागरिक अस्पताल तीसा में कार्यरत चिकित्सक को सोशल मीडिया पर प्रताड़ित किए जाने के विषय में गहन वार्ता हुई।


किसी भी व्यक्ति की सच्चाई की गहन जांच को किए बिना उसे सोशल मीडिया पर प्रताड़ित करना मानवीय अधिकारों का खंडन है। इस घटना मेंएक महिला ने चिकित्सक की संपूर्ण प्रतिष्ठा को सोशल मीडिया में दाव पर लगा दिया है। संघ यह बताना चाहता है कि उस महिला के साथ चिकित्सक की कोई भी आमने-सामने वार्ता नहीं हुई है।



जिस महिला ने चिकित्सक के बारे में बिना जांच के ही जो आरोप लगाए हैं वह उसके सोशल मीडिया में फैन फॉलोइंग बढ़ाने के लिए भी किया गया पब्लिसिटी स्टंट भी हो सकता है क्योंकि यह महिला अक्सर सोशल मीडिया में आए दिन रिल्स डालती रहती हैं और अपनी इसी आदत के चलते और अपनी फैन फॉलोइंग बढ़ाने के लिए यह एक सोची समझी साजिश भी हो सकती है।
जब तक इस संदर्भ में एक निष्पक्ष जांच सामने नहीं आती है तब तक यह सोशल मीडिया में चिकित्सक की प्रताड़ना को शीघ्र अति शीघ्र रोका जाना चाहिए। महिला के द्वारा चिकित्सा के ऊपर बार-बार इल्जाम लगाना और सोशल मीडिया में यह कहना की चिकित्सा ने उसकी फ ई आर को अपना प्रभाव दिखाकर रोक रखा है।

इस संदर्भ में भी एक निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और महिला के द्वारा बार-बार चिकित्सक की छवि को सोशल मीडिया में खराब करने के प्रयास को रोका जाना चाहिए।
मीडिया बाइट में जिस व्यक्ति विशेष ने चिकित्सक को थप्पड़ मारने की धमकी दी है उसकी भी सघन एवं निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए क्योंकि किसी को भी कोई भी दंड देना न्यायालय या कोई एक्शन लेना जांच कमेटी के दायरे में आता है और इस तरह से धमकाया जाना एक सभ्य समाज के लिए खतरा है।
इस प्रकरण की संघ जांच कमेटी की रिपोर्ट और न्यायिक जांच चाहता है। प्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों का बहुत अभाव चल रहा है जैसा की नागरिक अस्पताल तीसा में 17 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है और अभी पांच ही चिकित्सक वहां कार्यरत हैं।
जिन्हें 24 से लेकर 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी देनी पड़ रही है यदि वहां पर 17 चिकित्सक उपलब्ध होते तो इस तरह की घटना होने की कोई संभावना भी नहीं होती। यही हाल प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का है जहां कई स्वास्थ्य संस्थानों पर कोई भी चिकित्सक कार्यरत नहीं है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और नागरिक अस्पतालों में कई चिकित्सकों के पद इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के अनुरूप स्वीकृत नहीं है और अधिकांश में चिकित्सकों का अभाव चल रहा है। ऐसे में चिकित्सकों को सामान्य 8 घंटे को छोड़कर दिन-रात 12 से 36 घंटे तक कार्य करना पड़ रहा है।
संघ यह भी बताना चाहता है कि हिमाचल के चिकित्सकों को छुट्टी लेते समय ड्यूटी एडजस्ट करना और रविवार तथा सरकारी छुट्टियों में भी अपनी ड्यूटी एडजस्ट करते हुए भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
चिकित्सकों का कई जगह पर तो इतना अभाव है कि चिकित्सकों को लगातार ही 24x 7 ड्यूटी करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में चिकित्सकों को बहुत ही मानसिक प्रताड़ना और कार्य का अत्यधिक भार होने से स्वास्थ्य संतुलन पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
सोशल मीडिया में बिना तथ्यों की जांच किए हुए स्वास्थ्य कर्मचारियों को जिस तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है उससे उनके मनोबल को भारी ठेस पहुंच रही है और मानसिक संतुलन में डिप्रेशन का सामना करना पड़ रहा है। संघ की यह भी मांग रहेगी कि चिकित्सकों के ड्यूटी हॉर्स को शीघ्र डिफाइन किया जाए।
इस संदर्भ में संघ शीघ्र माननीय मुख्यमंत्री महोदय, माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य सचिव से वार्तालाप करेगा। संघ देश के अन्य राज्यों की तरह चिकित्सा समुदाय के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सोशल मीडिया में बदनाम करने के लिए उन राज्यों की तरह ही एक्ट लाने की मांग भी माननीय मुख्यमंत्री महोदय के समक्ष रखेगा।















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