



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- हिमाचल प्रदेश जाइका कृषि परियोजना के परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने दो दिनों तक सरकाघाट और जोगिंदरनगर क्षेत्र का व्यापक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद किया, उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया और कृषि संबंधी परियोजनाओं की प्रगति का गहन निरीक्षण किया। दौरे के पहले दिन विधायक चंद्रशेखर भी उनके साथ विशेष तौर पर उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और बाजारीकरण पर दिया विशेष जोर

पहले दिन सरकाघाट क्षेत्र में हल्दी, लहसुन और मटर–गेहूं की मिलवां खेती का निरीक्षण किया गया। डॉ. सुनील ने प्रगतिशील किसान अजय कुमार के हल्दी प्लॉट का मूल्यांकन करते हुए फसल प्रबंधन की सराहना की।
किसानों से संवाद, फील्ड निरीक्षण, कोल्ड स्टोर समीक्षा और कृषि प्रदर्शनी तक

इसके बाद विधायक चंद्रशेखर और परियोजना निदेशक बाल आश्रम भरनाल पहुँचे, जहाँ उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और उन्हें किचन गार्डन तैयार करने के लिए प्रेरित किया। टीम ने सिंचाई उप-परियोजना बकराटा और थौइन क्षेत्र का भी निरीक्षण किया, जहाँ मल्चिंग शीट, जैविक तरीकों व आधुनिक तकनीकों के उपयोग की स्थिति का मूल्यांकन किया गया। किसान संगोष्ठी में डॉ. सुनील ने युवाओं को कृषि नवाचार अपनाने तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विकास की विस्तृत प्रगति का आकलन

दूसरे दिन परियोजना निदेशक ने जोगिंदरनगर के चौंतड़ा क्षेत्र का दौरा किया और किसानों के खेतों में पहुँचकर फसलों की स्थिति, मिट्टी स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण पर जानकारी दी।

इसके बाद उन्होंने FIS बजगर खड्ड से भर्यारा तक निरीक्षण किया, जहाँ वेजिटेबल गार्डन, न्यूट्री किचन गार्डन और विभिन्न फसलों के डेमो प्लॉटों की समीक्षा की। उन्होंने किसानों को इंटरक्रॉपिंग, जैविक पोषक प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के लिए प्रेरित किया।

चौंतड़ा के सैटेलाइट ऑफिस स्थित कोल्ड स्टोर के निरीक्षण के दौरान स्टोरेज क्षमता, रखरखाव और किसान उपयोगिता की समीक्षा की गई। डॉ. सुनील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोल्ड स्टोर का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

ताकि सब्जियों और फलों की खराबी कम हो तथा किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सके। उन्होंने बाजारीकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया, ताकि किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें बल्कि अपनी उपज को सही मूल्य तक पहुँचा सकें।

इस अवसर डॉ सुनील चौहान ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि किसान केवल उत्पादन न बढ़ाएँ बल्कि अपनी उपज को सही बाज़ार से जोड़ने की क्षमता भी विकसित करें। प्राकृतिक खेती, किचन गार्डन और फसल विविधीकरण भविष्य की मजबूती हैं। बाजारीकरण पर ध्यान देना जरूरी है—उत्पाद की गुणवत्ता, पैकिंग और ब्रांडिंग जितनी बेहतर होगी, किसानों को उतना ही बेहतर मूल्य मिलेगा।

दौरे के अंतिम चरण में टीम बीड़ पैराग्लाइडिंग लैंडिंग साइट पर पहुँची, जहाँ किसानों द्वारा तैयार जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया गया। विदेशी और स्थानीय पर्यटकों द्वारा इस प्रदर्शनी को खूब सराहा गया। इस दौरान पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी जीवन ठाकुर भी मौजूद रहे। दो दिवसीय दौरे ने किसानों को प्राकृतिक खेती, उन्नत तकनीक, फसल विविधीकरण और बाजार से जुड़ाव की दिशा में नई उम्मीद और ऊर्जा प्रदान की।

इस दौरान जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेमराज वर्मा, एसएमएस डॉ. खूब राम, बीपीएम डॉ. अश्वनी कुमार, केवीके इंचार्ज डॉ. पंकज सूद तथा विभागीय स्टाफ भी शामिल रहा।
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