



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :— विधायक बड़सर इन्द्रदत्त लखनपाल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके मंत्री न केवल जनता को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा में भी सही और तथ्यात्मक आँकड़े रखने से बच रहे हैं। स्थिति यह है कि सदन के भीतर भी और सदन के बाहर भी सरकार सच बोलने को तैयार नहीं, जिससे प्रदेश की जनता का विश्वास पूरी तरह टूट चुका है।
“4500 करोड़ का दावा—श्वेत पत्र से क्यों डर रही सरकार ?”


विधायक लखनपाल ने कहा कि सरकार लगातार 4500 करोड़ रुपये के आपदा राहत पैकेज का दावा कर रही है, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह राशि कहाँ, कब और किसे दी गई। यदि सरकार के पास सच्चाई है, तो वह तत्काल श्वेत पत्र जारी कर पूरे प्रदेश के सामने तथ्य रखे। सिर्फ बयानबाजी और प्रेस विज्ञप्तियों से आपदा पीड़ितों का पेट नहीं भरता।



“आपदा के महीनों बाद भी राहत नदारद—संवेदनहीन शासन”
उन्होंने कहा कि भीषण आपदा को चार–पाँच महीने बीत जाने के बाद भी हजारों प्रभावित परिवार राहत और पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं। जिन लोगों ने अपने घर, जमीन और आजीविका खो दी, उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं। यह सरकार की प्रशासनिक विफलता ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की घोर कमी को भी दर्शाता है।

“पाँच महीनों से ट्रेजरी जाम—प्रदेश का विकास ठप”
विधायक लखनपाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश की ट्रेजरी पिछले पाँच महीनों से ठप पड़ी है। विधायकों की निधि जारी नहीं हो रही, विकास कार्य रुक गए हैं और जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सरकार की वित्तीय बदहाली अब छिपाए नहीं छिप रही।
“कन्यादान योजना ठप, ठेकेदारों की पेमेंट अटकी”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत पात्र बेटियों को समय पर राशि न मिलना बेहद शर्मनाक है। वहीं, प्रदेश भर में ठेकेदारों की पेमेंट लंबित होने से विकास कार्य बंद पड़े हैं और मजदूर वर्ग आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

“केंद्र से मिले 3789 करोड़ रुपये का हिसाब क्यों नहीं ?”
विधायक लखनपाल ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 से 2025 तक प्रदेश को दिए गए 3789 करोड़ रुपये का पूरा और स्पष्ट लेखा-जोखा प्रदेश सरकार आज तक क्यों नहीं दे पाई? यह पैसा किन मदों में खर्च हुआ, इसकी जानकारी न सदन में दी जा रही है और न ही जनता के सामने रखी जा रही है।
“आपदा के बीच जश्न—पीड़ितों के घावों पर नमक”
उन्होंने कहा कि जब आपदा प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हैं, तब मुख्यमंत्री द्वारा तीन वर्ष का जश्न मनाने पर 10 करोड़ रुपये खर्च करना, पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। यह सरकार की असंवेदनशील प्राथमिकताओं को उजागर करता है।
“श्वेत पत्र नहीं तो सड़क से सदन तक संघर्ष”
विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रदेश सरकार ने शीघ्र श्वेत पत्र जारी कर आपदा राहत, ट्रेजरी की स्थिति, केंद्र से प्राप्त धनराशि और वास्तविक खर्च का पूरा विवरण जनता के सामने नहीं रखा, तो भारतीय जनता पार्टी जनहित में सड़क से सदन तक निर्णायक आंदोलन करेगी। प्रदेश की जनता अब झूठे आँकड़ों और खोखले दावों को स्वीकार नहीं करेगी।















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