मनरेगा योजना में बदलाव ग्रामीण रोजगार गारंटी पर कुठाराघात: संदीप सांख्यान

बिलासपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर ने कहा कि वर्तमान भाजपा की केंद्र सरकार ने मनरेगा से एन बी एन तक (नाम बदलो नीति) अपना रखी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र की भाजपा सरकार साल 2014 से ने यूपीए सरकार की 40 से ज्यादा योजनाओं का नाम बदल चुकी है।

 

मनरेगा से (नाम बदलो नीति) एन. बी. एन. तक… संदीप सांख्यान

 

अब इन्होंने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देने वाली योजना “मनरेगा” के व्यवहारिक ढांचे को तो बदला है, साथ ही इसका नाम बदल कर “वी बी जी राम जी” कर दिया है, यह महात्मा गांधी जैसे युगपुरुष का अपमान है, और इसी जी राम जी के सहारे भाजपा अपनी चुनावी वैतरणी पार लगाने की सोच रही है, जबकि भाजपा यह भूल चुकी है कि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द “हे राम” ही थे। संदीप सांख्यान ने आरोप लगाते हुए कहा है “वी बी जी राम जी” योजना से प्रान्तों या राज्यों की सरकार को अतिरिक्त बोझ से लाद दिया है।

 

मनरेगा के नाम में बदलाव महात्मा गांधी का अपमान… संदीप सांख्यान

 

उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र की सरकार ने मरनेगा या ग्रामीण रोजगार गारंटी के लेकर जो खिलवाड़ किया है उसे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बसने वाला ग्रामीण समुदाय कभी माफ नहीं करेगा।

 

 

संदीप सांख्यान ने कहा कि मनरेगा में मिलने 10 प्रतिशत राज्य सरकारों के देना पड़ता था और 90 प्रतिशत मजदूरी का हिस्सा केंद्र वहन करता था लेकिन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से अपना झोला भरने वाली केंद्र सरकार ने राज्यों सरकारों को ही अतिरिक्त भोज से लाद दिया है जो कि सरासर गलत है।

 

 

संदीप सांख्यान ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले केंद्र सरकार ने “मनरेगा” योजना के बुनियादी नियमों में बदलाव करके इस ढांचे को बदलने की नाकाम कोशिश की थी लेकिन अब तो भाजपा के केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी ग्रामीण भारत मे रोजगार सृजन करने वाली योजना के नाम और स्वरूप दोनों में ही बदलाव करके ग्रामीण भारत को ठगा है।

 

 

संदीप सांख्यान ने कहा है यदि इसे ठीक से समझा जाए तो इसे राजनैतिक भाषा मे सरकार की ‘नाम बदलो नीति’ करार दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में केंद्र सरकार कई पुरानी योजनाओं, सड़कों, संस्थानों और कानूनों को नए नाम तो दिए हैं लेकिन वास्तव ऐसा कोई काम नहीं हो पाया है जिससे योजनाओं, संस्थानों या सड़को के नाम बदलने से जनसाधारण का कोई फायदा हुआ हो।

 

 

संदीप सांख्यान ने कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने की कवायद नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत को मिटाने की नाकाम कोशिश केंद्र सरकार कर रही है, जिसका खामियाजा भाजपा और केंद्र सरकार को भुगतना पड़ेगा।

 

 

“मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत साल 2005 में यूपीए सरकार ने की थी। यह योजना ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिनों के रोजगार की “कानूनी गारंटी” देती थी, लेकिन वर्तमान में वी बी जी राम जी योजना ने “मनरेगा” के मूल ढांचे को ही तोड़ कर रख दिया है।