



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- भारत रत्न, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, ओजस्वी वक्ता, कुशल प्रशासक एवं सुशासन के प्रतीक पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की नेत्री उषा बिरला ने उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
हार नहीं मानूंगा” की प्रेरणा आज भी हर भारतीय का मार्गदर्शन करती है – उषा बिरला


उषा बिरला ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे विचार, संस्कार और संवेदना के जीवंत प्रतीक थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ और उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं मानवीय करुणा को समर्पित रहा। उन्होंने राजनीति को नैतिकता, मर्यादा और संवाद की ऊँचाइयों तक पहुँचाया।



उन्होंने कहा कि अटल जी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में से एक थे। जनसंघ से लेकर भाजपा तक की वैचारिक यात्रा को उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से नई दिशा दी। वे तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने और प्रत्येक कार्यकाल में यह सिद्ध किया कि मजबूत, स्थिर और संवेदनशील नेतृत्व ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होता है।
उषा बिरला ने कहा कि अटल जी के प्रधानमंत्री काल में भारत ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

वहीं लाहौर बस यात्रा के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत शांति, संवाद और सौहार्द में विश्वास करता है।
उन्होंने आगे कहा कि अटल ने विकास को राजनीति का केंद्र बनाया।
स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, ग्रामीण सड़कों का विस्तार, दूरसंचार क्रांति और आधारभूत ढांचे का सशक्त निर्माण उनके दूरदर्शी नेतृत्व का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने “अंत्योदय” के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचाने का सपना देखा।
उषा बिरला ने कहा कि अटल की वाणी में कविता थी और उनके निर्णयों में अद्भुत दृढ़ता। वे विपक्ष का सम्मान करने वाले, लोकतंत्र को सशक्त करने वाले और हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले महान नेता थे। संसद में उनके विचारों में कटुता नहीं, बल्कि तर्क, तथ्य और संवेदना झलकती थी, इसी कारण वे मित्र और विरोधी—दोनों के लिए समान रूप से आदरणीय थे।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी एक श्रेष्ठ कवि और लेखक भी थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवता और जीवन-दर्शन की गहरी झलक मिलती है। उनकी अमर पंक्तियाँ—

“हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा”
आज भी हर भारतीय को संघर्ष, संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
अंत में उषा बिरला ने कहा कि अटल जी की जयंती पर हम सभी को उनके आदर्शों—राष्ट्रप्रथम, सुशासन, संवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता—को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए।
अटल जी की प्रेरणा सदैव राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक रहेगी और भारतीय जनता पार्टी उनके विचार-पथ पर चलते हुए राष्ट्र निर्माण के संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी।
अटल जी अमर हैं—अपने विचारों में, अपने कर्मों में और राष्ट्र के हृदय में।
इन्हीं शब्दों के साथ उन्हें शत-शत नमन।
वंदे मातरम्।
भारत माता की जय।















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