सहकार से समृद्धि केवल नारा नहीं, गांव-गांव तक पहुंचता विकास मॉडल: अनुराग सिंह ठाकुर

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सहकार से समृद्धि अब केवल एक नारा नहीं रह गया है, बल्कि यह गांव-गांव तक पहुंचने वाला एक प्रभावी और समावेशी विकास मॉडल बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर भारत की नींव को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

 

सहकारिता आत्मनिर्भर भारत की नींव को भविष्य में और मजबूत करेगी: अनुराग सिंह ठाकुर

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की कार्यकुशलता के परिणामस्वरूप सहकार से समृद्धि की परिकल्पना धरातल पर साकार हो रही है।

 

 

प्रधानमंत्री की इस सोच को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से 6 जुलाई 2021 को गठित सहकारिता मंत्रालय ने बीते चार वर्षों में सहकारी क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए हैं।

 

देश के पहले सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों और पहलों ने सहकारी संस्थाओं को समावेशी विकास, ग्रामीण समृद्धि और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनाया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान, महिलाएं, युवा और सहकारी संस्थाएं नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ी हैं।

 

उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) के माध्यम से संसाधनों को सुव्यवस्थित रूप से उपयोग में लाकर ऐसा बुनियादी ढांचा विकसित किया है, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।

 

 

एनसीडीसी के जरिए किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसानों को इनपुट, तकनीक, बाजार और वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो सके। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को बहुउद्देशीय बनाकर उन्हें ग्रामीण विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।

 

 

इसके लिए आदर्श उपविधियां लागू की गईं, जिन्हें 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनाया है। इसके परिणामस्वरूप पैक्स को डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण, जन औषधि केंद्र, पेट्रोल पंप, एलपीजी वितरण सहित 25 से अधिक नए व्यवसायों से जोड़ा गया है।

 

 

इसके अंतर्गत वित्तीय सहायता और सब्सिडी, मैचिंग इक्विटी ग्रांट सहित, प्रत्येक किसान को दो हजार रुपये तक और प्रत्येक एफपीओ को चार वर्षों में तीन किश्तों में पंद्रह लाख रुपये तक प्रदान की जा रही है।

 

इसके अतिरिक्त, तीन वर्षों के लिए प्रति एफपीओ अठारह लाख रुपये तक की ऑपरेशनल सपोर्ट ग्रांट दी जा रही है, जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी या प्रबंधक का वेतन, अकाउंटेंट का मानदेय, कार्यालय किराया, उपयोगिता सेवाएं, फर्नीचर और अन्य आवश्यक खर्च शामिल हैं।

 

साथ ही, एक हजार करोड़ रुपये के फंड के माध्यम से क्रेडिट गारंटी सुविधा भी प्रदान की गई है, जिसके तहत एक करोड़ रुपये तक के ऋण का 85 प्रतिशत और एक से दो करोड़ रुपये तक के ऋण का 75 प्रतिशत कवर किया जा रहा है, ताकि बैंकों से बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध हो सके।

 

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना शुरू की गई है। अब तक 112 पैक्स में गोदाम बनकर तैयार हो चुके हैं, जिनसे 68 हजार मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।

 

इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ सुरक्षित भंडारण की सुविधा भी प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस में 8.4 लाख से अधिक सहकारी समितियों का डेटा शामिल किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और सहकारी रैंकिंग प्रणाली के माध्यम से प्रतिस्पर्धा को भी प्रोत्साहन मिला है।

 

इसके साथ ही सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने के लिए सहकारी विश्वविद्यालय की योजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।