



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :- भाजपा नेत्री उषा बिरला ने हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र, संविधान और पंचायती राज व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हमेशा समय पर होते आए हैं और यह प्रदेश की मजबूत लोकतांत्रिक परंपरा रही है।
आपदा में भी समय पर हुए थे चुनाव, अब टालने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण – उषा बिरला


उषा बिरला ने कहा कि वर्ष 2020–21 में जब पूरी दुनिया कोरोना जैसी सबसे बड़ी आपदा से जूझ रही थी, उस समय स्कूल, कॉलेज बंद थे, संपूर्ण लॉकडाउन लगा हुआ था, फिर भी वर्ष 2021 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अपने निर्धारित समय पर सफलतापूर्वक करवाए। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो हर परिस्थिति में लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है।



उन्होंने कहा कि आज की स्थिति बिल्कुल अलग है। पूरे प्रदेश में स्कूल और कॉलेज नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं, सरकारी कार्यक्रम और कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक व अन्य आयोजन भी लगातार हो रहे हैं।
ऐसे में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का सहारा लेकर पंचायत चुनाव टालने का प्रयास करना पूरी तरह से अनुचित और अलोकतांत्रिक है।

उषा बिरला ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की आधारशिला हैं। ग्राम पंचायत, पंचायत समितियां और जिला परिषदें गांवों के विकास की धुरी हैं। यदि इनके चुनाव समय पर नहीं होंगे तो ग्रामीण विकास और जनभागीदारी बुरी तरह प्रभावित होगी।
प्रशासक नियुक्त करना जनता के मताधिकार और लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि संवैधानिक संस्थाओं को अनिश्चितकाल तक स्थगित नहीं किया जा सकता। समय पर चुनाव कराना सभी संबंधित संस्थाओं की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
भाजपा नेत्री उषा बिरला ने कहा कि अब यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि चुनाव आयोग और प्रशासन आपसी समन्वय से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पंचायत चुनाव संपन्न करवाएं, ताकि प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपरा बनी रहे और गांव-गांव तक जनता की आवाज मजबूत हो।
















Total Users : 125142
Total views : 189291