



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, विकासनगर हमीरपुर के विद्यार्थियों ने बौद्धिक खेल शतरंज में अपनी विलक्षण प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।

विद्यार्थियों की यह उपलब्धि उनके अनुशासन, एकाग्रता एवं निरंतर अभ्यास का सशक्त प्रमाण है, जिससे समूचे विद्यालय परिवार में हर्ष और गर्व का वातावरण बना हुआ है।


शतरंजलॉजी शतरंज अकादमी द्वारा आयोजित बारहवीं रैपिड शतरंज प्रतियोगिता–2026 में कक्षा छठी की छात्रा आधारिका ने तृतीय स्थान तथा आर्णा ने चतुर्थ स्थान प्राप्त कर विद्यालय की उत्कृष्टता को सिद्ध किया।



इसी क्रम में 3 व 4 जनवरी को आयोजित प्रथम इंटरनेशनल ओपन फाइड रेटेड रैपिड शतरंज टूर्नामेंट–2026 में भी विद्यालय के अनेक होनहार विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के अंडर–12 वर्ग में कक्षा छठी की आर्णा, आधारिका व पार्थ, कक्षा सातवीं के आतिक्ष व अभिजय, कक्षा आठवीं के उत्कर्ष व उन्नति, कक्षा पाँचवीं के दिव्यम, कक्षा चौथी के आद्विक व रचित तथा कक्षा तीसरी के हर्षुल, शिवाली एवं शिवाय ने सहभागिता की।

प्रतियोगिता में कक्षा तीसरी की छात्रा शिवाली ने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तृतीय पुरस्कार अर्जित किया, जो विद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
इसके अतिरिक्त अंडर–19 वर्ग में कक्षा ग्यारहवीं की छात्राएँ शैरिल एवं पलक ने विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें छात्रा पलक को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “श्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार” से सम्मानित किया गया, जबकि शैरिल ने भी सराहनीय खेल का प्रदर्शन किया।
इन सभी उल्लेखनीय उपलब्धियों के उपलक्ष्य में विद्यालय में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में अकादमिक प्रधानाचार्या डॉ. हिमांशु शर्मा, उपप्रधानाचार्य अश्वनी कुमार एवं क्रीड़ा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अकादमिक प्रधानाचार्या ने सभी विजेता विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इन सफलताओं के पीछे विद्यालय के शतरंज प्रशिक्षक कमल एवं प्रशिक्षक सुमन का समर्पित मार्गदर्शन एवं निरंतर प्रशिक्षण अत्यंत सराहनीय रहा।

साथ ही, विद्यार्थियों की इस उपलब्धि में अभिभावकों का निरंतर सहयोग, प्रोत्साहन एवं विश्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा, जिसने बच्चों का मनोबल बढ़ाकर उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।















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