चलौंठी में मकानों में दरारें और कई परिवार फिर बेघर: किसान सभा

शिमला :- आखिर ये कैसा विकास और कैसी तरक्की जहां परिवार बेघर हो रहे हैं और लोगों की जीवनभर की पूंजी फोरलेन निर्माण की भेंट चढ़ रहे हैं।

निर्माण कंपनियां बेझिझक अपनी मनमानी कर रही हैं और _सरकारों , स्थानीय प्रतिनिधियो , और विभागों के अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं, कोई रोक_ नहीं।

संजय वन में भवन ढह गया। 6 और मकानों में दरारें आ गई। कई परिवार अभी तक बेघर हैं। अपने घरों में नहीं लौट पाए।

लेकिन अफसोस इस बात का है कि जब शुराला के लोग लड़ रहे थे तो भट्टाकुफर वाले चुप थे। संजय वन कॉलोनी के लोग अपना दर्द बयान कर रहे थे तो बाकी लोग सामने नहीं आ रहे थे। और अब चलौंठी वाले अपना दुखड़ा सुना रहे हैं तो प्रभावित और आम जनता खामोश है।

भट्टाक़ुफर में सड़क पर अचानक बड़ा गड्ढा। बच्ची की जान जाते–जाते बची।

यही खामोशी निर्माण कंपनियों को मनमानी करने की ताकत देती है और सरकार और उसके नुमाइंदों को अपनी ज़िम्मेदारी से बचने के लिए मौका।

ये कंपनियां जिन्हें हज़ारों करोड़ रुपए के टैंडेर मिलें हैं चुनावों में राजनैतिक पार्टियों को चंदा देती हैं। चाहे वह इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए दें या किसी दूसरे रास्ते से उन्हें खुश करें।

इसलिए सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, केंद्र में बैठी सरकार हो या प्रदेश की सरकार, इन कंपनियों के खिलाफ कुछ भी बोलने से गुरेज़ करती हैं।

सरकार, कुछ भ्रष्ट अफसरशाही और कॉरपोरेट या बड़ी कंपनियों का यह गठजोड़ हमेशा जनता के खिलाफ काम करता रहा है। इस नापाक गठजोड़ को तोड़ने के लिए जनता की एकजुटता ज़रूरी है।

अगर आम जनता राहत चाहती है तो उनकी लामबंदी, एकजुटता और संघर्ष ही उन्हें बचा सकता है।

इसलिए किसान सभा फोरलेन प्रभावितों और आम जनता का आह्वान करती है कि आप अपनी समस्याओं को लेकर लामबंद हो जाएँ और अपने जान-माल की रक्षा के लिए संघर्ष करे।

किसान सभा की मांग है कि इन कंपनियों के काम की समीक्षा हो।

_सरकार विशेषज्ञ संस्थाओं, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्था (GSI), IIT रूड़की, IIT मंडी से कंपनियों के निर्माण कार्यों की वैज्ञानिक समीक्षा करवाए।_

फोरलेन निर्माण से हो रहे नुकसान के लिए मुआवज़ा भी दे और अगर कंपनियां काम में वैज्ञानिक तरीका नहीं अपनाती तो निर्माण कार्य को बंद करवाया जाए।

19 जनवरी 2026 को टॉलैंड से सचिवालय तक इन सभी मुद्दों पर एक मार्च निकला जाएगा।

आपसे निवेदन है कि इस मार्च में शामिल हों ताकि सरकार पर कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए दबाव बनाया जा सके।