प्रदेश के साथ बजट में खुला भेदभाव: डॉ पुष्पेंद्र वर्मा

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- केंद्र सरकार के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं हमीरपुर सदर के विधायक जिस तरह बजट की तारीफों के पुल बाँध रहे हैं, वह हिमाचल प्रदेश की जनता की समझ का अपमान है।

आरडीजी ग्रांट रोकना जनता से धोखा 

 

 

हम सिर्फ एक सीधा और जायज़ सवाल पूछना चाहते हैं कि जब इस बजट में हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी ग्रांट पूरी तरह रोक दी गई, जो अगले पाँच वर्षों में 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये के बीच बनती है, तो फिर यह बजट हिमाचल के लिए “अच्छा” कैसे हो सकता है?

 

 

भाजपा की तारीफें मजबूरी व खोखली

 

भाजपा नेता यह कहकर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रदेश सरकार आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर पाई। हम उनसे पूछना चाहते हैं कि 2023 की भीषण आपदा के बाद, जब केंद्र सरकार ने स्वयं अपने सर्वेयर हिमाचल भेजे, नुकसान का आकलन किया और घाटे का अनुमान लगाया, तब भी हिमाचल को फूटी कौड़ी तक क्यों नहीं दी गई।

 

 

क्या तब भी आंकड़े गलत थे या सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर हिमाचल की अनदेखी की?

भाजपा के प्रवक्ता यह भी दावा कर रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने बजट बहुत अच्छे से प्रस्तुत किया था , इसलिए 15वें वित्त आयोग में हिमाचल को 35,000 करोड़ रुपये एक्स्ट्रा मिलेथे। यह पूरी तरह भ्रामक बयान है।

 

 

सच्चाई यह है कि यह कोई “एक्स्ट्रा राशि” नहीं थी, बल्कि आरडीजी ग्रांट थी, जिसे अब इस बजट में पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह हिमाचल प्रदेश की जनता और उसके विकास के साथ सीधा धोखा है।

 

 

जय राम जी के गुणगान और खोखले दावों से हिमाचल का भला नहीं होने वाला। हिमाचल की जनता पढ़ी-लिखी और जागरूक है, उसे बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। वह अच्छी तरह जानती है कि 35,000 करोड़ रुपये क्या होते हैं और उसका प्रदेश के विकास में क्या महत्व है।

 

 

 

सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार की हर योजना में हिमाचल प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए भाजपा अपने आंकड़े और दावे अपने पास ही रखे।

 

 

हम साफ शब्दों में कहना चाहते हैं कि यह बजट हिमाचल प्रदेश के लिए बेकार है और बेकार ही रहेगा, क्योंकि इसमें हिमाचल के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।