शोध HPU के द्वारा आयोजित संगोष्ठी

शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ :-   SHoDH हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की ओर से युवा-दिवस के उपलक्ष्य पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सीमा ठाकुर, संयोजक नेक राम, प्रांत संयोजक सर्वेश दीक्षित और अन्य शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद रहे। डॉ. सीमा ठाकुर ने विवेकानंद के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला तथा उनके चरित्रिक गुणों को युवा के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बताया। साथ में भगत सिंह, राजगुरु इत्यादि के आदर्शों को उजागर किया।

नई युवा पीढ़ी को तकनीक और मूल्यों में सामंजस्य बिठाने की बात कही। घुसपैठ और आतंकवाद आज एक जटिल समस्या बना हुआ है। JNU और मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़कर भी युवाओं में साम्प्रदायिक और संकुचित मानसिकता है और वो देश विरोधी हरकतों में लिप्त हैं।

ठाकुर ने बताया कि युवाओं में प्रतिस्पर्धी का होना आवश्यक है लेकिन इस गलाकाट प्रतियोगिता में विवेकानंद ने पढ़ाई का एक बड़ा उद्देश्य चरित्र निर्माण भी बताया है।

 

युवाओं के लिए नैतिक कर्तव्य को सर्वोपरि बताया। पाश्चात्य संस्कृति की ओर युवाओं का झुकाव होना अत्यंत चिंतनीय विषय है। परिवर्तन संसार का नियम है। वह होना भी चाहिए लेकिन सकारात्मकता की ओर। सकारात्मक परिवर्तन की ओर ही युवाओं को आगे बढ़ना जरूरी है।

 

 

ठाकुर ने बताया कि विवेकानंद का शिकागो भाषण सभी युवाओं को पढ़ना चाहिए। औपनिवेशिक मानसिकता का त्याग और भारतीय संस्कृति का आलिंगन अब इस काल की महती आवश्यकता बन गई है और यह ज़िम्मेदारी सबसे अधिक अकादमिक जगत के लोगों पर शोधार्थियों और प्राचार्यों पर है।

इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिसर में सामाजिक चेतना, युवा शक्ति, सेवा और सामंजस्य की भावना को और अधिक मजबूत किया तथा यह संदेश दिया कि युवा, वायु की तरह है और इसको सही दिशा प्रदान कर किसी भी राष्ट्र या समाज को उसकी उन्नति के उत्स पर लाकर खड़ा किया जा सकता है।