



बिलासपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने कहा है कि सोशिल इंजीनियरिंग के माध्ययम से राजनीतिक बुआई को फसल तक के पकने तक पहुंचाने वाले हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नाम के आगे वास्तव में लोकप्रिय शब्द ही सुशोभित होता है।

एक कुशल राजनीतिक योद्धा स्थापित हो चुके हैं सूक्खु…. संदीप सांख्यान




एक कुशल राजनीतिक योद्धा के रूप के रूप में जिस प्रकार इन्होंने न सिर्फ अपने विरोधियों को नाको चने चबवाए बल्कि अपनी पार्टी के भीतर यदा कथा उठने वाली ज्वाला को भी शिद्दत से शांत कर परिचय दिया कि वे दूर की सोच रखते हुए विकास को लक्ष्य मानने वाले हैं।






दूरगामी सोच के प्रेरक हैं सूक्खु…. संदीप सांख्यान



विरोधियों का काम ही कटाक्ष करना या विरोध करना है, जो कि राजनीतिक प्रक्रिया में एक सामान्य सी बात है, आए दिन नेता प्रतिपक्ष के बयान इस छटपटाहट को बयान करते रहते हैं। बावजूद इसके सीएम सुक्खू की चूलें हिलाने में हिमाचल से





लेकर दिल्ली तक के दिग्गजों ने एड़ी चोटी का जोर लगाकर देख लिया लेकिन सच्चाई की नींव पर चल रही सुक्खू सरकार न सिर्फ इस पारी को खेलेगी बल्कि जिस प्रकार की सोच लेकर वे चलें हैं, उससे जीत दोहराई जाना लगभग तय है।


संदीप सांख्यान ने कहा कि संघर्षों की पगडंडियों से होकर गुजरे ठाकुर सुखविंद्र सिंह आज भले ही फोरलेन और एक्सप्रेस वे से परिचित हों, इसके पीछे उनकी ईमानदारी से की गई मेहनत है, जो आज फलीभूत हो रही है।
विपरीत परिस्थितियों में अपनी पार्टी के स्वार्थी तत्वों से निपटते हुए न सिर्फ सरकार बचाई बल्कि केंद्र के दिग्गजों को भी आईना दिखाया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आम जनता की सरकार है, इसे तोड़ना आसान न होगा। आम जनता से निकल कर आए यह पहले ऐसे नेता हैं जो जनता का दर्द भलि प्रकार समझते हैं इसलिए
विपक्ष को पूछते हैं कि विपक्ष बताएं कि विधानसभा सत्र कितने दिनों तक ओर चलाना है, पर जनहित के मुद्दों पर राजनीति करे विपक्ष, केवल विरोध के लिए
विधानसभा सत्र न हो। संदीप सांख्यान ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के भीतर ही नौ उपचुनाव हुए थे और कांग्रेस फिर से 40 सीटों पर ही काबिज रही जबकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने सरेआम खुल कर बगावत कर दी। विपक्ष और भाजपा की ओर से साम, दाम, दंड, भेद जैसी कूटनीतिक सामने आई पर फिर भी सीएम सुक्खू का न तो विश्वास डगमगाया और न ही कोई रणनीति फ्लाॅप साबित हुई, बल्कि इस अग्निपरीक्षा इस अग्नि परीक्षा में सुखविंद्र सिंह सुक्खू कुंदन बनकर उभरे। कांग्रेस कार्यकाल में सुखाश्रय योजना, विभागों में युक्तिकरण की नीति, शिक्षा संस्थानों में केंद्रीय बोर्ड तक की ब्रांडिंग, विश्विद्यालयों में भर्ती लोक सेवा आयोग से, आपदा में जनता के साथ खड़े होना, रेवन्यू डेफिसिट ग्रांट का न मिल पाना, आपदा राशि मे प्रधानमंत्री के 1500 करोड़ नहीं मिलने के वावजूद सेलरी, पेंशन और विकासात्मक योजनाओं को आगे बढाते हुए विपक्ष को लोहे के चने चबाने के लिए छोड़ दिया और फिर प्रदेश के लोंगो की जनसंवेदनाओं को समझते हुए कठोर और नीतिगत फैसलों में पीछे नहीं हटना प्रदेश के मुख्यमंत्री से विपक्ष को भी सीखना चाहिए। संदीप सांख्यान ने कहा कि विपक्ष खण्ड-खण्ड तोड़ कर पांच धड़ो में स्थापित करना, मुख्यमंत्री की गहन कूटनीति का हिस्सा रहा। चन्दा चोरी से लेकर ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर भाजपा और विपक्ष की भूमिका जनता के समक्ष रखना। प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र की उपलब्धियों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार को ललकारना किसी सिंहनाद से कम तो नही आंका जा सकता है। युवाओ को स्वरोजगार के लिए

प्रेरित करके बुनियादी सुविधाओं के साथ नए उपक्रमों को स्थापित एक हठयोगी ही करवा सकता है। इस योजना में 680 करोड़ रुपये अग्रिम राशि थी। संदीप सांख्यान ने कहा कि पहली कैबिनेट में बैठक बहाल कर प्रदेश के 1. 36 लाख कर्मचारियों को सम्मान ओपीएस बहाली की गई। देश की राजधानी दिल्ली के द्वारका में 145 करोड़ की लागत का हिमाचल निकेतन दिल्ली के द्वारका, जिसमें 107 कमरे है। यह हिमाचल के मरीजों एवं छात्रों और अपाहिजों के लिए दूसरा घर साबित होगा। हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे.बोर्डिंग स्कूल का सपना भीइसी सोच का हिस्सा है, और सबसे बडी बात प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नशा विरोधी और चिट्टे के खिलाफ जो अभियान चलाया है वह देश के किसी अन्य राज्य के मुख्यमंत्री नहीं चला पा रहे हैं।




