CM का गृह ज़िला होने के बावजूद जल शक्ति विभाग से बाहर निकाले जा रहे सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी; रोजी-रोटी का गहराया संकट

 शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ:-  हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग में कार्यरत सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। NIELIT शिमला द्वारा जारी एक ताज़ा पत्र (संख्या: NIELIT/SML/51/2026/8376) के अनुसार, 30 सितम्बर 2026 के बाद बिना औपचारिक अनुबंध विस्तार के किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी को कार्यालय में न आने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

सबसे बड़ा और दुखद सवाल यह उठ रहा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी का गृह ज़िला (Hometown) होने के बावजूद ज़िला हमीरपुर के कर्मचारियों के साथ ऐसा अन्याय क्यों हो रहा है? जिस हमीरपुर ज़िले ने प्रदेश को नेतृत्व दिया, वहीं के जल शक्ति विभाग में सालों से अपनी सेवाएँ दे रहे गरीब कर्मचारियों को रातों-रात नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह निर्णय गरीब परिवारों के पेट पर सीधी लात मारने जैसा है। पिछले कई वर्षों से ये आउटसोर्स कर्मचारी बेहद कम वेतन में दिन-रात मेहनत करके जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू रख रहे हैं। अब अचानक 30 सितम्बर से उनकी सेवाएँ समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है।

कर्मचारी संघ की मुख्य माँगे:-

जल शक्ति विभाग और NIELIT के इस जन-विरोधी आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।

मुख्यमंत्री जी अपने गृह ज़िले सहित पूरे प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों के अनुबंध का समय पर विस्तार (Extension) सुनिश्चित करें।

किसी भी गरीब कर्मचारी की रोज़ी-रोटी न छीनी जाए।

आउटसोर्स कर्मचारी माननीय मुख्य्मंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह से अनुरोध करता है कि 30 सितम्बर 2026 से पहले इनके अनुबंध का विस्तार किया जाए यदि अगर ऐसा नहीं होता तो मजबूरन IPH विभाग मे लगे आउटसोर्स कर्मचारी अपने परिवारों के साथ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

 

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