



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- दिव्यांग सरकारी बेटी की मृत्यु के उपरांत सरकारी वित्तीय लाभ परिवार को प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। परिवार की महिला ने इसके लिए पंचायत के सचिव को जिम्मेदार ठहराया है। महिला का कहना है कि दिव्यांग बेटी को पंचायत की तरफ से पंचायत रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया।

तंग आकर परिवार समस्या के समाधान के लिए पहुंचा डीसी के दरबार




हालांकि पंचायत के कई बार चक्कर काट चुके हैं तथा एफेडेविट भी दे चुके हैं। यह बात महिला ने उपायुक्त को सौंपे पत्र दर्ज की हैं। महिला बरफी देवी निवासी गांव भदडू डाकघर कंज्याण तहसील भोरंज जिला हमीरपुर में उपायुक्त को पत्र सौंपा है।






उपायुक्त से लगाई समस्या के समाधान की गुहार


इसने बताया कि यह रोजी रोटी कमाने के लिए कोटखाई जिला शिमला में चले गए थे। वहां पर यह तथा इसका पति मेहनत कर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। इसी दो बेटियां हैं जिसमें से एक 80 प्रतिशत दिव्यांग है तथा नाम कौशल्या देवी है। दिव्यांग बेटी को इन्होंने पीएचडी करवाई तथा बाद में उसकी सरकारी नौकरी गल गई। उसे बाद उसने शिमला में सेवाएं दी हैं तथा अब घर के नजदीक ही सेवाएं दे रही है।




महिला ने बताया कि यह अपनी पंचायत दिम्मी में गए तथा सचिव ने इन्हें एफेडेविट जमा करवाने के लिए कहा। इसने कहा कि एफेडेविट बनवाकर दिए हैं। बावजूद इसके बेटी को पंचायत रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया। महिला ने डीसी को सौंपा पत्र में यह भी कहा है कि सचिव ने इसके साथ बदतमीजी की है।


महिला ने बताया कि वह ढ़ाई साल से पंचायत के चक्कर काट रहे हैं। महिला ने बताया कि उनकी बेटी की अब मृत्यु हो चुकी है। सरकारी कर्मचारी के परिवार को मृत्यु के उपरांत जो लाभ मिलता है वह नहीं मिल पा रहा है।
पत्र के माध्यम से महिला ने पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है तथा जो वित्तीय लाभ मिलने है उन्हें दिलवाने की गुहार लगाई है।





