



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), हमीरपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ-6.0 के दूसरे दिन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने की मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज रहे विशिष्ट अतिथि




इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कांगड़ा के लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दूसरे दिन का केंद्रीय विषय ‘विज्ञानमय भारत–विकसित भारत’ रहा, जिसके अंतर्गत विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।






पांच राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा पर हो रही चर्चा



9 से 11 अक्टूबर तक आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन में शिक्षा, विज्ञान, शोध, उद्योग, मीडिया, सामाजिक क्षेत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।





महाकुंभ का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान और आध्यात्मिक चेतना को शिक्षा से जोड़ते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्था विकसित करने के लिए संवाद स्थापित करना है। आयोजन के तहत आज राष्ट्रीय कॉन्क्लेव के माध्यम से शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।



राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा महाकुंभ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नवाचार, शोध और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज तकनीक दुनिया को तेजी से बदल रही है। ऐसे में समाज की समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को इस योग्य बनाना चाहिए कि वे रोजगार तलाशने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बनें।
राज्यपाल ने युवाओं को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करते हुए अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा को व्यावहारिक ज्ञान, वैज्ञानिक सोच और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है।
इस अवसर पर कांगड़ा के लोकसभा सांसद डॉ.राजीव भारद्वाज ने कहा कि विज्ञान ऐसा होना चाहिए, जिसका लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर किसानों और मजदूरों तक पहुंचे। उन्होंने भारतीय संस्कृति की वसुधैव कुटुंबकम् की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा विश्व हमारा परिवार है और भारत का विज्ञान सभी के कल्याण के लिए होना चाहिए।

उन्होंने चंद्रयान मिशन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने चंद्रमा के ऐसे क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतरकर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया, जहां पहले कोई देश नहीं पहुंच पाया था। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टार्टअप के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है।
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब विद्यार्थी और युवा पढ़ाई के साथ-साथ शोध एवं अनुसंधान पर भी ध्यान दे रहे हैं। शिक्षा महाकुंभ जैसे आयोजन चिंतन और संस्कारों को बढ़ावा देने के साथ इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सामूहिक प्रयासों के माध्यम से वर्ष 2047 तक भारत को विज्ञानमय और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और इसके लिए ठोस योजना के साथ सामूहिक प्रयास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हम सभी का साझा संकल्प होना चाहिए। शिक्षा महाकुंभ इस दिशा में चिंतन और संवाद के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपनी गति और कार्यक्षमता बढ़ानी होगी। इसके लिए सामूहिक प्रयासों के साथ शिक्षा की गुणवत्ता और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। आज की युवा पीढ़ी आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन इस दौड़ में हमें अपनी संस्कृति, शिक्षा के मूल्यों और संस्कारों को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को केवल रटने तक सीमित न रखे, बल्कि उनके भीतर जिज्ञासा पैदा करे और उन्हें सवाल पूछने तथा नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करे। राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और देश के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि शिक्षा, कौशल विकास, तकनीक और सांस्कृतिक मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए, तो भारत वर्ष 2047 तक दुनिया की अग्रणी महाशक्तियों में शामिल हो सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ-6.0 के दूसरे दिन हुए विचार-विमर्श में इस बात पर जोर दिया गया कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा को विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना होगा। वक्ताओं ने युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, शोध को प्रोत्साहित करने और शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
महाकुंभ के माध्यम से शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से देश की भावी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।




