गेयटी थिएटर ‘बाल रंगमंच महोत्सव’ शिमला में हुआ सम्पन्न: डॉ संदीप शर्मा

शिमला/विवेकानंद वशिष्ठ:-  अक्टूबर 2026 तक ऐतिहासिक गेयटी थिएटर, शिमला में किया गया। महोत्सव के अंतर्गत अंतरविद्यालय हिंदी नाटक प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिंदी की कहानियों पर नाटकों की रंगमंचीय प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

हमीरपुर के सुप्रसिद्ध लेखक डॉ संदीप शर्मा की कहानी पर आधारित नाटक ‘बूढ़ों का गाँव’ शानदार मंचन के साथ कई अवार्ड अपने नाम कर गया।

 

महोत्सव की विशेषता यह रही कि इसमें 16 लेखक, 16 कहानियां, 16 नाटक और 16 इंस्टीट्यूट्स की सहभागिता रही। रंगमंच के मुख्य अतिथियों के रूप में मशहूर फिल्मी एक्टर और रंगमंच आर्टिस्ट

दिव्या जगदाले और डैन धनोआ ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

महोत्सव में ईसीआई शैले डे स्कूल के बाल कलाकारों द्वारा हमीरपुर के प्रसिद्ध लेखक डॉ संदीप शर्मा की सामाजिक सरोकार से संबंधित कहानी पर नाटक ‘बूढ़ों का गाँव’ का उत्कृष्ट मंचन प्रस्तुत किया ।

कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में ‘बाल रंगमंच महोत्सव’ का आयोजन

नाटक का निर्देशन सुचेता मेहता और पंकज बिष्ट द्वारा किया गया, जबकि संजीव अरोड़ा ने क्रिएटिव डायरेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘बूढ़ों का गाँव’ हिमाचल के बदलते सामाजिक जीवन, बदलते ग्रामीण परिवेश और बुजुर्गों से जुड़े संवेदनशील सरोकारों को सामने लाने वाली कहानी है। बाल कलाकारों द्वारा कहानी को भावनात्मक रंगमंचीय रूप में प्रस्तुत करना इस आयोजन की विशेषता रही।

 

कुल 16 नाटकों में बूढ़ों का गांव कहानी पर मंचित नाटक ने बेस्ट परफॉर्मर का अवार्ड अपने नाम किया। बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी बूढ़ों का गांव कहानी छेतू राम पात्र को मिला।

बेस्ट प्रॉप का अवार्ड के साथ यह नाटक अपनी अलग छाप छोड़ता हुआ दर्शकों द्वारा बहुत सराहा गया।

कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की यह पहल बच्चों को रंगमंच से जोड़ने के साथ-साथ हिंदी साहित्य और नाट्य परंपरा के प्रति उनकी रुचि विकसित करने का अवसर प्रदान कर रही है।

 

लेखक डॉ संदीप शर्मा ने बताया कि यह कहानी एक ऐसे गांव पर आधारित है जिसमें अब केवल बूढ़े लोग ही बचे हैं और उनके सब बेटे बेटियां दूर प्रदेशों या विदेश में रोजगार की तलाश में निकल गए हैं नाटक में यह बूढ़े अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों को बड़े कष्ट के साथ गुजर रहे हैं और अपने बच्चों से दूर रहने का गम सहना कर रहे हैं इसके पीछे व्यवसाय की तलाश या माइग्रेशन हो लेकिन यह एक नई सामाजिक समस्या बनती जा रही है

आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों में हिंदी भाषा, साहित्य, रंगमंच और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति रुचि विकसित करना है।

 

मंच के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता, संवाद-अभिव्यक्ति, अभिनय क्षमता और सामाजिक सरोकारों को प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

तीन दिवसीय यह महोत्सव युवा कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान करने के साथ-साथ हिंदी नाट्य परंपरा को विद्यालय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

[post-views]