सुरक्षित राष्ट्र, सशक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प के साथ संपन्न हुआ शिक्षा महाकुंभ 6.0

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर में आयोजित तीन दिवसीय शिक्षा महाकुंभ 6.0 सुरक्षित राष्ट्र, सशक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। शिक्षा महाकुंभ 6.0 में ‘सुरक्षित भारत–विकसित भारत’ विषय पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, मीडिया साक्षरता, कृषि नवाचार और सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों पर हुआ व्यापक मंथन। बेटन हस्तांतरण के साथ शिक्षा महाकुंभ 7.0 आईआईटी जम्मू में आयोजित करने की घोषणा की गई।

‘सुरक्षित भारत–विकसित भारत’ विषय पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, मीडिया साक्षरता, कृषि नवाचार और सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों पर हुआ व्यापक मंथन

समापन समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक एवं समाजसेवी डॉ. इंद्रेश कुमार, आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा, इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश, त्रिपुरा सरकार की सचिव एवं आईएएस अधिकारी सोनल गोयल तथा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के रजिस्ट्रार अमिताभ रंजन सहित अनेक शिक्षाविद्, विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए।

बेटन हस्तांतरण के साथ शिक्षा महाकुंभ 7.0 आईआईटी जम्मू में आयोजित करने की हुई घोषणा

शिक्षा महाकुंभ के समापन अवसर पर ‘सुरक्षित भारत–विकसित भारत’ विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, भारतीय ज्ञान परंपरा, मीडिया साक्षरता, युवा शक्ति, कृषि में एआई के उपयोग और सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों सहित राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। पैनल चर्चा का संचालन डॉ. ठाकुर ने किया।

 

शिक्षा महाकुंभ के समापन अवसर पर अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण के तीन प्रमुख आयाम शिक्षा, सुरक्षा और समृद्धि हैं। भारत इन तीनों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सुरक्षा एवं समृद्धि के मार्ग पर अपनी क्षमताओं को निरंतर मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कम जनसंख्या वाले कई विकसित देश अनुसंधान एवं नवाचार को प्राथमिकता देते हैं, योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करते हैं, भ्रष्टाचार और नशे पर नियंत्रण रखते हैं तथा बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान देते हैं।

अनुराग ठाकुर ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को विकसित किया है और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा, सुरक्षा और समृद्धि के समन्वय से भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना आवश्यक : डॉ. इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक एवं समाजसेवी डॉ. इंद्रेश कुमार ने भारतीय सभ्यता, सिंधु सभ्यता और सनातन परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि विविधता को विवाद का नहीं, बल्कि सुंदरता का आधार मानना चाहिए। डॉ. इंद्रेश कुमार ने स्वतंत्रता, स्वाभिमान, सुरक्षा, शिक्षा और संस्कारों को प्राथमिकता देने पर बल देते हुए ‘नेशन फर्स्ट, नेशन लास्ट और नेशन ऑलवेज’ का संदेश दिया। शिक्षा के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि अच्छे इंसान, जिम्मेदार नागरिक और देशभक्त तैयार करने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा महाकुंभ का मूल उद्देश्य भी ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है, जो राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझें और समाज के विकास में योगदान दें।

बदलते नैरेटिव के दौर में मीडिया साक्षरता जरूरी : प्रो. के.जी. सुरेश

इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश ने वर्तमान समय में मीडिया साक्षरता की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न विषयों पर अलग-अलग नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों के लिए सूचनाओं को समझना, उनकी सत्यता की जांच करना और भ्रामक जानकारी से बचना बेहद जरूरी है।उन्होंने कहा कि जिम्मेदार मीडिया, जागरूक नागरिक और तथ्यों पर आधारित संवाद एक सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आपदा प्रबंधन में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी : प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा

आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं और आपदा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने शिक्षा में संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन के लिए स्थानीय परिस्थितियों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय आवश्यक है।

एआई और डिजिटल तकनीक से कृषि क्षेत्र में नए अवसर : प्रो. राजीव आहूजा

आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने एग्रोटेक, डिजिटल कृषि और खेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से कृषि क्षेत्र को अधिक सक्षम, उत्पादक और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार किसानों की कार्यक्षमता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों पर चर्चा

त्रिपुरा सरकार की सचिव एवं आईएएस अधिकारी सोनल गोयल ने भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों और सीमावर्ती क्षेत्रों की विभिन्न चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशील परिस्थितियों, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और प्रशासनिक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर जोर दिया।

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में सरकारी योजनाओं की अहम भूमिका..

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के रजिस्ट्रार अमिताभ रंजन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के समग्र विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

तेजस ओलंपियाड का लोकार्पण
शिक्षा महाकुंभ 6.0 के समापन समारोह के दौरान डीएचई द्वारा तैयार ‘तेजस ओलंपियाड’ का लोकार्पण भी किया गया। यह कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प…..

शिक्षा महाकुंभ 6.0 के समापन सत्र में तीन दिनों के दौरान आयोजित शैक्षणिक गतिविधियों, अकादमिक संवादों और राष्ट्रीय विमर्श का अवलोकन किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक चेतना, तकनीकी विकास और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर हुए विचार-विमर्श ने राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा।

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