



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- जिला हमीरपुर दिव्यांग समीक्षा समिति के सदस्य राजन कुमार ने प्रदेश सरकार से दिव्यांगजनों की आर्थिक सहायता राशि में बढ़ोतरी करने, राहत भत्ते का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने तथा दिव्यांगता के आधार पर बनाई गई विभिन्न श्रेणियों की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है।

40% से 99% दिव्यांगता वाले व्यक्तियों की सहायता राशि में बढ़ोतरी न होने पर उठाए सवाल, प्रदेश में कई दिव्यांगों को राहत भत्ता नहीं मिलने की समस्या पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग



उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि दिव्यांगजनों की आर्थिक स्थिति, दिव्यांगता की गंभीरता और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए।






राजन कुमार ने कहा कि वर्तमान में दिव्यांगजनों को दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखकर आर्थिक सहायता दी जाती है।



उनके अनुसार, 40% से 69% तक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को ₹1050 प्रतिमाह तथा 70% से 100% तक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को ₹1700 प्रतिमाह राहत राशि दी जाती रही है।





वहीं, अब 100% दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए ₹3000 प्रतिमाह सहायता राशि की नई श्रेणी बनाए जाने की बात सामने आई है।


उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 100% दिव्यांगता वाले व्यक्तियों की सहायता राशि बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है, तो 40% से 99% तक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों की राहत राशि में भी बढ़ोतरी क्यों नहीं की गई? क्या इन दिव्यांगजनों को दवाइयों, इलाज, देखभाल और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहारे की आवश्यकता नहीं है?
100% दिव्यांग अजय कुमार 4 महीने से और 90% दिव्यांग ध्यान सिंह का कहना है कि 9 महीने से दिव्यांग राहत भत्ते खाते में नहीं आई है। भुगतान भी नियमित नहीं होने पर जताई चिंता
राजन कुमार ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांगजनों के सामने केवल कम राहत राशि की समस्या ही नहीं है, बल्कि भत्ते का भुगतान भी सुचारू रूप से नहीं हो रहा है। कई दिव्यांगजनों के बैंक खातों में राहत भत्ते की राशि आ रही है, जबकि कई अन्य पात्र दिव्यांगजन अभी भी इस सहायता से वंचित हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार दिव्यांगजनों के लिए राहत राशि जारी कर रही है, तो कुछ लाभार्थियों के खातों में पैसा पहुंच रहा है और कुछ के खातों में क्यों नहीं?

उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि इस मामले की गंभीरता से जांच करवाई जाए और पता लगाया जाए कि किन कारणों से पात्र दिव्यांगजनों को राहत भत्ते का भुगतान नहीं हो रहा है।
यदि किसी तकनीकी समस्या, दस्तावेजों की कमी, सत्यापन या प्रशासनिक देरी के कारण भुगतान रुका हुआ है, तो उसे जल्द दूर किया जाए। साथ ही, जिन पात्र दिव्यांगजनों की राहत राशि लंबित है, उन्हें बकाया भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए राहत भत्ता कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा है। बहुत से दिव्यांगजन दवाइयों, इलाज और दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें
70% से 100% तक दिव्यांगता वाले सभी पात्र व्यक्तियों की पेंशन बढ़ाकर ₹5000 प्रतिमाह की जाए।
40% से 69% तक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों की आर्थिक सहायता राशि में भी पर्याप्त बढ़ोतरी की जाए।
दिव्यांगजनों को दिव्यांगता की श्रेणियों में बांटने की व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए उनकी वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।
प्रदेश में सभी पात्र दिव्यांगजनों को राहत भत्ते का भुगतान नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाए।
जिन दिव्यांगजनों के खातों में राहत भत्ता नहीं पहुंच रहा है, उनके मामलों की जांच कर भुगतान न होने के कारणों को स्पष्ट किया जाए।
पात्र लाभार्थियों की लंबित राहत राशि जारी करवाई जाए और भविष्य में भुगतान में देरी न हो, इसके लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
गंभीर रूप से प्रभावित, बिस्तर पर रहने वाले और पूरी तरह दूसरों पर निर्भर दिव्यांगजनों के लिए विशेष आर्थिक सहायता का प्रावधान किया जाए।
राजन कुमार ने मुख्यमंत्री से विनम्र आग्रह किया कि प्रदेश के दिव्यांगजनों की इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द उचित निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को आर्थिक सहायता देना तभी सार्थक होगा, जब सहायता राशि पर्याप्त होने के साथ-साथ समय पर उनके बैंक खातों में पहुंचे।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार को दिव्यांगजनों की आवाज सुनकर ऐसा कदम उठाना चाहिए, जिससे प्रत्येक पात्र दिव्यांग व्यक्ति को समय पर राहत मिले और वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।




