हमीरपुर नगर निगम में शामिल करने से पहले जनमत संग्रह कराया जाए

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ :-   हमीरपुर की वर्तमान नगर परिषद और छह पंचायतों को नगर निगम में शामिल करने के हालिया कैबिनेट निर्णय पर सीपीआई (एम) जिला कमेटी हमीरपुर चिंता व्यक्त करती है और मांग करती है कि इस निर्णय को लागू करने से पहले जनमत संग्रह कराया जाए। यह फैसला सीधे तौर पर पंचायतों के लोगों के जीवन, रोजगार और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित करेगा।

 

आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में सी पी आई एम के राज्य सचिवालय सदस्य और जिला सचिव प्रताप राणा ने ये बात कही l बस्सी झन्यारा, बोहणी और ददूही अमरोह, बोहनी पंचायतों के प्रतिनिधि पहले ही जिला उपायुक्त के पास अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। खासतौर पर नगर निगम बनने पर लोगों पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी कम होंगे l

 

नगर निगम बनने पर संपति कर और ग्रामीण शुल्क बढ़ जाता है जिससे ग्रामीण लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा l साथ ही मनरेगा जैसी योजना को लेकर भी गंभीर अनिश्चितता है, जो इन पंचायतों में गरीब लोगों के रोजगार का मुख्य स्रोत है। नगर निगम बनने के बाद मनरेगा का लाभ जारी रहेगा या नहीं, इस पर सरकार की ओर से कोई स्पष्टता नहीं है।

 

मनरेगा एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जो वित्तीय रूप से पूरी तरह सक्षम है। इसके अलावा, पंचायतों का स्थानीय शासन और विकास कार्यों में सीधा नियंत्रण कमजोर हो जाएगा, जिससे लोगों की भागीदारी घटेगी l पंचायतों में गांव और छोटे इलाकों के लिए विशेष रूप से चुने गए प्रतिनिधि होते हैं जो स्थानीय समस्याओं को बेहतर समझते हैं और जल्दी हल करने में सक्षम होते हैं नगर निगम में निर्णय aam तौर पर शहरी क्षेत्रों के दृष्टिकोण से लिए जाते हैं ।

 

जिससे ग्रामीण मुद्दे और आवश्यकताएँ उपेक्षित होती हैं। नगर निगम में टाउन और काउंटी प्लानिंग ऐक्ट के लागू होने से कम भूमि बालों लोगों को मकान बनाने की भी दिक्कत होगी निर्माण पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा lसीपीआई (एम) जिला कमेटी का मानना है कि जनभावनाओं का सम्मान करना जरूरी है और सरकार से आग्रह करती है कि प्रभावित पंचायतों में जनमत संग्रह के बाद ही इस निर्णय को लागू किया जाए। पार्टी जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

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