जायका समर्थित कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला 24 फरवरी से: डॉ. सुनील चौहान

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-II, द्वारा ‘सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास’ विषय पर जायका सहायता प्राप्त कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजन 24 से 26 फरवरी तक धर्मशाला में किया जा रहा है। यह जानकारी परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने सोमवार को दी।

माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कृषि मंत्री प्रो चंद्र कुमार कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

कार्यशाला में जायका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो, जायका-इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि वाकामात्सु एइजी, हिमाचल प्रदेश सरकार के कृषि सचिव डॉ. सी. पॉलरासु, डॉ वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन के कुलपति डॉ. आर. सिंह चंदेल सहित सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय के अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे।

 

डॉ. चौहान ने बताया कि इस कार्यशाला में देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि भाग लेंगे। प्रतिभागियों में भारत सरकार एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के अधिकारी, देशभर की विभिन्न जायका सहायता प्राप्त परियोजनाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सफल कृषि उद्यमी, एग्री-टेक नवप्रवर्तक, प्रगतिशील किसान एवं अन्य प्रमुख हितधारक शामिल होंगे।

 

उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला सतत कृषि विकास एवं कृषि-व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान-विनिमय, सहयोग और नीतिगत संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगी।

 

परियोजना निदेशक डॉ. चौहान ने बताया कि कार्यशाला को पाँच मुख्य विषयों: संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियाँ एवं जलवायु-लचीली खेती, जलवायु-लचीली सतत कृषि में तकनीक एवं नवाचार, कृषि-व्यवसाय में सतत मूल्य शृंखला एवं समावेशी बाजार पहुंच का निर्माण, सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल और कृषि-व्यवसाय स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन, आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी ।

 

 

 

 

 

भविष्य की योजनाओं में मूल्य संवर्धन हेतु समूह चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी। प्रतिनिधियों के लिए हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना स्थलों का दौरा भी प्रस्तावित है।

 

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक फसलों से उच्च-मूल्य एवं व्यावसायिक फसलों की ओर संक्रमण पर विचार-विमर्श कर किसानों और उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना है।

 

कार्यशाला के उद्देश्यों में सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास की सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान एवं प्रसार, कृषि में प्रासंगिक एवं विस्तार योग्य एग्री-टेक हस्तक्षेपों की पहचान एवं प्रोत्साहन, तथा हितधारकों के बीच संस्थागत एवं विपणन संबंधों को सुदृढ़ करना शामिल है।

 

उन्होंने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना का द्वितीय चरण 1010 करोड़ रुपये की लागत से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) के सहयोग से जुलाई 2021 से 2029 तक संचालित है तथा अपनी आधी अवधि पूर्ण कर चुका है।

 

 

 

इस परियोजना के अंतर्गत 296 उप-परियोजनाओं के माध्यम से 8000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई प्रणालियों का निर्माण कर लगभग 30,000 परिवारों को लाभान्वित करने तथा लगभग 7000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल विविधीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

 

 

 

 

 

 

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