बाबा बालक नाथ ट्रस्ट में बाहरी लोगों को दी जा रही है, तहजीर ग्राम वासियों में रोष: सोम दत्त 

 हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  दियोटसिद्ध मंदिर से जुड़े चकमोह गांव के पूर्व स्थानीय न्यासियों व बाबा बालक नाथ अनुवांशिक संघ के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात कर मांग उठाई कि मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों में सबसे पहले चकमोह गांव के युवाओं को रोजगार दिया जाए।
गांव के प्रतिनिधियों ने कहा कि चकमोह गांव का मंदिर स्थापना से लेकर आज तक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गांव के बुद्धिजीवी वर्ग ने समाधिलीन महंत शिव गिरी की सोच को आगे बढ़ाते हुए करोड़ों रुपये की भूमि एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के लिए दान की थी।
 इसके बाद महंत द्वारा देखे गए 100 बेड के अस्पताल के सपने को पूरा करने के लिए भी गांव के लोगों ने अपनी करोड़ों रुपये की भूमि दान में दी, जो आज मंदिर ट्रस्ट के अधीन है।
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले कॉलेज के विस्तार के लिए भी गांव के लोगों ने जमीन दान दी थी। उस समय के एसडीएम ने आश्वासन दिया था कि इस संबंध में डीसी हमीरपुर से बात हो चुकी है और गांव के लोगों को उनका हक जरूर मिलेगा तथा रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी।
यह भी कहा गया था कि यदि जमीन कॉलेज के नाम कर दी जाए तो यूजीसी से नए कोर्स शुरू करने के लिए पात्रता मिल जाएगी।
गांव के प्रतिनिधियों का कहना है कि जमीन देने के बावजूद कॉलेज में कोई नया कोर्स शुरू नहीं किया गया, बल्कि पहले से चल रहे एमए हिंदी और एमए संस्कृत के कोर्स भी बंद कर दिए गए।
 यहां पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए जो परीक्षा केंद्र हुआ करता था, वह भी बंद कर दिया गया, जिससे आसपास के गांवों के युवाओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि गांव के हक की बात करते समय गांव के बुद्धिजीवी लोगों की बात तक नहीं सुनी जाती। हाल ही में हुई दो नियुक्तियों—एक ड्राइवर और एक प्लंबर—में भी स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
 बताया जा रहा है कि एक ड्राइवर नादौन विधानसभा क्षेत्र से और एक प्लंबर भोरंज विधानसभा क्षेत्र से नियुक्त किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में रोष है।
गांव के युवक मंडल, महिला मंडल, ग्राम सुधार सभा और अनुवांशिक संघ के लोग अब एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हो गए हैं।
 जानकारी के अनुसार बाबा बालक नाथ अनुवांशिक संघ ने इस मामले को कोर्ट तक ले जाने का निर्णय लिया है।
प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट में बाहरी लोगों को मनमाने तरीके से भुगतान कर काम पर रखा जा रहा है, जबकि गांव के युवाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
 ट्रस्ट के वित्तीय मामलों को देखने वाले अधिकारी से भी किसी प्रकार की जवाबदेही तय नहीं की जाती, जबकि छोटी-छोटी बातों पर कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी जाती है।
गांव के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि जल्द ही चकमोह गांव के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी गई और गांव के हक की अनदेखी जारी रही तो ग्रामीणों को मजबूर होकर बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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