डॉ. चौहान ने जून तक 200 सिंचाई सब-प्रोजेक्ट्स पूरा करने का लक्ष्य किया: डॉ. सुनील चौहान

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- ग्रामीण हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को किसानों के परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से मजबूत बनाने के लिए परियोजना के कार्यों को मैदान स्तर पर तेजी से आगे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

 

हिमाचल प्रदेश फ़सल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना -II, जायका-ओडीए, के परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने शनिवार (7 मार्च) को ये विचार परियोजना इकाइयों के प्रतिनिधियों की बैठक में व्यक्त किए।

 

डॉ. चौहान पिछले माह हुई जायका मध्यावधि समीक्षा मिशन की यात्रा, राष्ट्रीय कार्यशाला एवं कार्य-योजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में वर्ष 2025-26 की वित्तीय एवं भौतिक योजनाओं की समीक्षा की गई तथा 2026-27 के लिए वार्षिक कार्य-योजना पर भी चर्चा की गई।

 

डॉ. चौहान ने कहा कि परियोजना की गतिविधियों को इस प्रकार समन्वित किया गया है कि वे अंततः राज्य सरकार के उस लक्ष्य को पूरा करें जिसके अंतर्गत किसानों के परिवारों की आय बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जाना है।

 

उन्होंने कहा कि यह कार्य सतत कृषि प्रणालियों के निर्माण और परियोजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ लोकप्रिय सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियों के अनुरूप है, जिसका नेतृत्व माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ‘सुक्खू’ कर रहे हैं।

 

 

परियोजना निदेशक ने कहा कि सभी फील्ड यूनिट प्रमुखों को सब-प्रोजेक्ट स्तर से लेकर राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई स्तर तक ऐसी रणनीति तैयार करनी होगी जिससे पहले से तैयार मासिक कार्ययोजनाओं के अनुसार सभी गतिविधियों को समय पर पूरा किया जा सके और परियोजना के कार्यों को तेज गति दी जा सके।

 

डॉ. चौहान ने सभी इकाई प्रमुखों को जून, 2026 तक परियोजना क्षेत्र में 200 सिंचाई योजनाओं को पूरा करके किसानों को समर्पित करने का लक्ष्य दिया ताकि किसानों को और सशक्त बनाया जा सके।

 

 

जायका मध्यावधि समीक्षा मिशन की यात्रा और पहली राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद यह बैठक आत्ममंथन का अवसर है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में दीर्घकालिक सफलता का मार्ग और अधिक सुगम होगा।

 

उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश जायका कृषि परियोजना के इकाई प्रमुखों ने परियोजना में कार्य करने की रणनीति को समझ लिया है और उन्हें चाहिए कि वे योजना निर्माण, क्रियान्वयन, फीडबैक तथा अनुवर्ती कार्यों की बारीकियों को सभी स्तरों पर नए कर्मियों तक पहुँचाएं, ताकि कार्य केवल एक वर्ग की कार्य-शक्ति पर निर्भर न रहे।

 

डॉ. चौहान ने बताया कि परियोजना के लगभग सभी बुनियादी ढांचा कार्य पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं। अब हमें मुख्य रूप से फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करना होगा, अर्थात उत्पादन बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों, समान रूचि समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (SHGs, CIGs, FPOs) जैसे सामाजिक नेटवर्क को मजबूत बनाने पर जोर देना होगा।

 

 

इसके साथ-साथ कटाई के बाद की गतिविधियों को सुदृढ़ करते हुए उत्पादों की ब्रांडिंग कर उन्हें आंतरिक, बाहरी और अंतरराज्यीय बाजारों से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों को दीर्घकालिक रणनीति के साथ युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाना होगा।

 

 

बैठक में वित्त अधिकारी प्रदीप शर्मा, उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेंद्र सिंह (सोलन), डॉ. संतोष शर्मा (हमीरपुर), डॉ. योगिंदर पाल कौशल (पालमपुर) तथा डॉ. हेम राज वर्मा (मंडी) उपस्थित रहे।

 

इसके अलावा SPMU के विषय विशेषज्ञ डॉ. जगदीश कुमार, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. अनु यादव, वरिष्ठ विपणन अधिकारी नितिका सोनी, DPMU पालमपुर से डॉ. रजनीश शर्मा तथा 15 ब्लॉक परियोजना प्रबंधन इकाइयों के ब्लॉक परियोजना प्रबंधक या उनके प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।

 

[post-views]