




हमीरपुर:- हमीरपुर जिला के राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज बरू में छात्रों के स्वास्थ्य से जुड़े एक अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक मामले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।



कॉलेज प्रशासन की लापरवाही, असावधानी और सफाई व्यवस्था की अनदेखी के कारण लगभग 20-21 विद्यार्थी अचानक बीमार हो गए। कई विद्यार्थियों में पीलिया, उल्टियां, कमजोरी एवं अन्य संक्रमणजनित लक्षण पाए गए, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।







प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉलेज परिसर में स्थित पानी की टंकियों की नियमित एवं वैज्ञानिक तरीके से सफाई नहीं की गई। सफाई के नाम पर सीवेज युक्त दूषित पानी का उपयोग किया गया, जिससे पेयजल स्रोत प्रदूषित हो गया।




विद्यार्थियों को वही पानी पीने के लिए उपलब्ध करवाया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हुआ। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रभावित विद्यार्थियों में से एक छात्र की हालत अत्यंत गंभीर हो गई।


उसे पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया, किंतु हालत में सुधार न होने पर उसे पीजीआई रेफर करना पड़ा, जहाँ उसे ICU में भर्ती करना पड़ा। इस घटना ने न केवल छात्रों बल्कि उनके परिवारों को भी गहरे मानसिक आघात में डाल दिया है।
सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में संवेदनशीलता और तत्परता का अभाव देखने को मिला। प्रभावित छात्रों का हालचाल जानने, उनके उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने या दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन की चुप्पी और उदासीनता ने छात्रों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
शैक्षणिक संस्थान वह स्थान होते हैं जहाँ विद्यार्थी अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर आते हैं। किंतु जब उसी संस्थान में उन्हें स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध न हो, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस प्रकार की घटना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
(ABVP) हमीरपुर विभाग इस पूरे प्रकरण की कड़ी शब्दों में निंदा करता है तथा जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें करता है—
1. पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच तत्काल प्रभाव से करवाई जाए।
2. जल स्रोतों, टंकियों एवं सीवरेज व्यवस्था का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
3. जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाएं, उनके विरुद्ध सख्त से सख्त अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. प्रभावित विद्यार्थियों के उपचार का संपूर्ण खर्च प्रशासन द्वारा वहन किया जाए तथा उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
5. कॉलेज परिसर में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था, नियमित जल परीक्षण एवं निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
6. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी विशेष समिति का गठन किया जाए।
ABVP स्पष्ट करना चाहता है कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शीघ्र एवं ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो विद्यार्थी हित में संगठन व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।
हम जिला प्रशासन, विशेषकर उपायुक्त महोदया से आग्रह करते हैं कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित हस्तक्षेप करें और दोषियों को दंडित कर विद्यार्थियों को न्याय दिलाएं।




