




सोलन/शिमला :- सोलन स्थित Shoolini University में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया और सैकड़ों छात्रों ने एकजुट होकर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।



यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते छात्र की समस्या को गंभीरता से लिया होता, तो आज यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।:-अभाविप






अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही, असंवेदनशीलता और छात्रों की सुरक्षा को लेकर उदासीन रवैये का परिणाम है। परिषद ने आरोप लगाया कि लंबे समय से छात्र अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहा था , लेकिन प्रबंधन ने उन्हें लगातार नजरअंदाज किया।



एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री अभी ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक छात्र की मौत पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते छात्र की समस्या को गंभीरता से लिया होता, तो आज यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है, जो कि अत्यंत निंदनीय है।


उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एबीवीपी किसी भी सूरत में इस मामले को दबने नहीं देगी और जब तक सच्चाई सामने नहीं आती तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो विद्यार्थी परिषद पूरे प्रदेश के अंदर आंदोलन करेगी


प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए न्याय की मांग की और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक जवाबदेही पूरी तरह से विफल रही है।
एबीवीपी ने इस घटना के संदर्भ में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
• मामले की उच्च स्तरीय/न्यायिक जांच करवाई जाए
• घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए
• विश्वविद्यालय में छात्र सुरक्षा के ठोस और पारदर्शी प्रावधान लागू किए जाएं
• पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता एवं न्याय सुनिश्चित किया जाए
• छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाए
एबीवीपी ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को बाध्य होगी।






