




नई-दिल्ली:- देशभर में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर मचे घमासान और लगातार बढ़ते जनविरोध के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा और राहतभरा फैसला लिया है। अब स्मार्ट मीटर लगवाना किसी भी उपभोक्ता के लिए अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि यह पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था होगी। यानी अब बिजली विभाग किसी भी उपभोक्ता के घर पर उसकी मर्जी के बिना जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकेगा।
देशभर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत




यह फैसला ऐसे समय आया है जब हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में स्मार्ट मीटरों को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों तक पहुंच चुका था। उपभोक्ताओं का आरोप था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। सबसे बड़ी राहतः लगवाने के बाद हटवाने की भी मिलेगी सुविधा







सरकार ने उपभोक्ताओं को एक और बड़ी राहत देते हुए साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति स्मार्ट मीटर लगवाता है और बाद में उसे यह व्यवस्था पसंद नहीं आती, तो वह इसे हटवा भी सकेगा।




इतना ही नहीं, स्मार्ट मीटर लगवाने के दौरान जमा की गई सिक्योरिटी राशि भी वापस की जाएगी।
यानी अब उपभोक्ता के पास यह अधिकार होगा कि वह अपनी सुविधा के अनुसार फैसला ले और जरूरत पड़ने पर पुरानी व्यवस्था में लौट सके।


डिफॉल्टरों और बिजली चोरी करने वालों पर रहेगी सख्ती
हालांकि केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत ईमानदार उपभोक्ताओं के लिए है।
जो लोग लंबे समय से बिजली बिल नहीं भर रहे हैं या जानबूझकर डिफॉल्टर बने हुए हैं, उनके लिए नियम सख्त रह सकते हैं।
भारी भरकम बिलों से भड़का जनआक्रोश

पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई थीं। लोगों का कहना था कि जैसे ही पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए गए, बिजली के बिल अचानक
आसमान छूने लगे। शिमला से धर्मशाला तक कई जगहों पर उपभोक्ताओं ने
रैलियां, प्रदर्शन और विरोध मार्च निकाले। बढ़ते दबाव और जनआक्रोश के बाद आखिरकार यह मुद्दा दिल्ली तक पहुंचा और केंद्र सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
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कोई भी उपभोक्ता अगर स्मार्ट मीटर नहीं लगवाना चाहता,
तो उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाएगा। स्मार्ट मीटर केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को दिए जाएंगे जो स्वेच्छा से इस तकनीक का लाभलेना चाहेंगे।
जबरन पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने की खबरों का भी सरकार ने खंडन किया है।




