




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- जहां आज के दौर में लोग अपने स्वार्थ तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र की पंचायत वलोह के गांव से संबंध रखने वाली ललिता जसवाल मानवता की मिसाल बनकर समाज सेवा की एक अनूठी कहानी लिख रही हैं।

यह कहानी केवल सेवा की नहीं, बल्कि एक पिता के सपनों को साकार करने की है। स्वर्गीय शूरवीर सिंह (पूर्व एयरफोर्स कर्मी) ने अपने जीवनकाल में “श्रेष्ठा कुमारी मेमोरियल ट्रस्ट” की स्थापना कर गरीब बच्चों की शिक्षा को अपना मिशन बना लिया था।










उनका मानना था कि अगर एक बच्चे को भी शिक्षा मिल जाए, तो एक परिवार का भविष्य बदल सकता है।आज उनके इस अधूरे सपने को उनकी बेटी ललिता जायसवाल पूरी निष्ठा, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा रही हैं।



इसी सेवा भाव के तहत आज श्रेष्ठा कुमारी मेमोरियल ट्रस्ट, वलोह द्वारा गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल विरडी में बच्चों के बीच फल (केले) वितरित किए गए और तीन जरूरतमंद बच्चों को स्कूल के जूते प्रदान किए गए।


बच्चों के चेहरों पर आई मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि छोटी-सी मदद भी किसी के लिए कितनी बड़ी खुशी बन सकती है। इस अवसर पर स्कूल की प्रधानाचार्य पूनम अंजना एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।


ट्रस्ट की सेवा यहीं तक सीमित नहीं है। हर वर्ष बाल आश्रम सुजानपुर टिहरा, जिला हमीरपुर के दो बच्चों के नाम उच्च शिक्षा के लिए (एफ.डी) ₹10,000-₹10,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें।

इसके साथ ही वलोह हाई स्कूल के पांच विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष ₹1200 की सहायता, स्कूल बैग, जूते एवं अन्य आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाती है।
सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि श्रेष्ठा कुमारी मेमोरियल ट्रस्ट पिछले 38 वर्षों से बिना किसी सरकारी सहायता के निरंतर सेवा कार्यों में जुटा हुआ है। यह संस्था पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और केवल मानवता के आधार पर कार्य करती है।
ट्रस्ट की अध्यक्ष ललिता जसवाल, जो सामान्यतः दिल्ली में रहती हैं, हर बार हिमाचल आकर अपने गांव और आसपास के जरूरतमंद बच्चों की मदद करना नहीं भूलतीं। उनका कहना है
“यह केवल एक ट्रस्ट नहीं, मेरे पिता का सपना है… और जब तक मुझमें सामर्थ्य है, मैं इस सपने को जीवित रखूंगी।” ललिता जसवाल का यह प्रयास समाज के लिए एक संदेश है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ और पहचान के की जाए।




