




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- डाॅ. सुरेंद्र सिंह डोगरा ने राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर चर्चा करते हुए बताया कि सुरक्षित मातृत्व के छह स्तंभ हैं: 1) परिवार नियोजन, 2) प्रसवपूर्व देखभाल, 3) प्रसूति देखभाल, 4) प्रसवोत्तर देखभाल, 5) गर्भपात के बाद की देखभाल, और 6) यौन संचारित रोग/एचआईवी नियंत्रण।




यह दिवस मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल बेरी में मनाया गया। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल 11 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस’ मनाया जाता है, जो कस्तूरबा गांधी की जयंती के साथ मेल खाता है।








इसका उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और उसके बाद महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, उचित देखभाल और पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है ताकि मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके।





मुख्य तथ्य और उद्देश्य इस प्रकार हैं: ऐतिहासिक संदर्भ यह है कि भारत आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस घोषित करने वाला दुनिया का पहला देश है।

उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद देखभाल के प्रति जागरूक करना और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

लक्ष्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है ताकि असुरक्षित प्रसव के कारण होने वाली मातृ मृत्यु को रोका जा सके। सरकारी प्रयास के तहत इस दिवस के माध्यम से सरकार जननी सुरक्षा योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता और मुफ्त सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर देती है।
यह दिन मातृ स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान है।




