




हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- भाजपा नेत्री एवं महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री कमलेश कुमारी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को शीघ्र लागू कर महिलाओं को नीति निर्माण में उनका उचित स्थान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आज भारत की आर्थिक प्रगति में महिलाओं की भूमिका केवल सहभागिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता की अग्रणी शक्ति बन चुकी हैं।








आर्थिक सशक्तिकरण से राजनीतिक भागीदारी तक—महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में लाना समय की मांग





कमलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भागीदार बनाया गया है। उन्होंने विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में महिलाओं ने अभूतपूर्व प्रगति की है।


प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत हर एक रुपये में से लगभग 68 पैसे महिलाओं को दिए गए हैं और वर्ष 2015 से अब तक महिलाओं को ₹14.72 लाख करोड़ से अधिक का ऋण प्राप्त हुआ है, जिससे लाखों महिलाओं ने अपना व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भरता हासिल की है।

उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के जनधन खाते खोले जा चुके हैं, जो वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ी क्रांति है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत 83 प्रतिशत ऋण, जो कि ₹47,704 करोड़ है, महिलाओं को दिया गया है।

वहीं सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ खातों के माध्यम से ₹3.40 लाख करोड़ की बचत सुनिश्चित की गई है, जो बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में भी महिलाओं की स्थिति तेजी से मजबूत हो रही है। DAY-NRLM के अंतर्गत 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं और इनमें से 3 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो सालाना ₹1 लाख से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 2.90 करोड़ घर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किए गए हैं, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिली है।
कमलेश ने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, तो उन्हें राजनीतिक निर्णयों में भी समान भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेगा। यह कानून देश में अधिक संवेदनशील, समावेशी और जवाबदेह शासन व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को केवल घोषणाओं तक सीमित रखा गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वास्तविकता में बदलने का साहस दिखाया। उन्होंने कहा कि अब इस अधिनियम को लागू करने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो परिवार, समाज और देश तीनों मजबूत होते हैं, और नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत को अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।




