डी.ए. वी. आलमपुर में मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

आलमपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल आलमपुर, जिला काँगड़ा हिमाचल प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर जन्माष्टमी महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास, उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया।

 

विद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण और रंगारंग प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। इस अवसर पर नर्सरी से कक्षा दूसरी तक के छात्र रंग-बिरंगे एवं आकर्षक परिधानों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के स्वरूप में सजकर विद्यालय पहुँचे ।

बच्चों की मनमोहक वेशभूषा और उत्साह ने समारोह की शोभा को और भी बढ़ा दिया। विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के जीवन एवं जन्माष्टमी पर्व की महत्ता को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

महोत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए बाँसुरी सजावट, मुकुट सजावट, मटकी सजावट एवं शुभकामना कार्ड निर्माण जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

 

बच्चों द्वारा तैयार की गई आकर्षक कलाकृतियों ने सभी का मन मोह लिया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने मनमोहक एवं आकर्षक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियाँ देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘नंद के घर आनंद भयो’ विषय पर आधारित इस उत्सव ने नन्हें विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सुअवसर प्रदान किया l साथ ही भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव करने का भी अवसर दिया।

उत्सव का समापन बहुप्रतीक्षित ‘मटकी फोड़’ कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को नवीन खुशियों से भर दिया।

 

विद्यार्थियों के साथ जन्माष्टमी का एक प्रेरणादायक संदेश भी साझा किया गया, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रेम,करुणा,धर्मपरायणता और भक्ति जैसे जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला गया।

इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य  सुरजीत कुमार राणा ने सभी विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व हमें अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति और सभ्यता से जोड़ते हैं तथा हमारी परंपराओं को संजोए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि हमें समय-समय पर बच्चों के साथ ऐसे पर्व अवश्य मनाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी भारतीय संस्कृति, संस्कारों और गौरवशाली परंपराओं को समझ सके तथा उनसे जुड़ी रहे।

 

जन्माष्टमी महोत्सव ने विद्यार्थियों को न केवल अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का भी सुंदर संदेश दिया।

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