



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस संवैधानिक व्यवस्था का विरोध कर जनता में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान की दुहाई देने वाले कांग्रेस नेताओं को पहले संविधान और चुनाव संबंधी कानूनों का अध्ययन करना चाहिए।

वोट चोरी का आरोप लगाने वाली पार्टी पुनरीक्षण का विरोध क्यों कर रही: विजय अग्निहोत्री




अग्निहोत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पूर्व में भी मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण होता रहा है। वर्ष 2002 से 2004 के बीच भी ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई थी। ऐसे में कांग्रेस द्वारा इसका विरोध किया जाना उसके राजनीतिक रुख में विरोधाभास को दर्शाता है।






उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता लगातार मतदाता सूचियों में फर्जी एवं दोहरे नामों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। जब एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों की जांच, दोहरे नामों की पहचान तथा अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है, तो कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है। यदि कांग्रेस वास्तव में वोट चोरी के आरोपों को लेकर गंभीर है तो उसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।


पूर्व विधायक ने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने पर ईवीएम और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, जबकि जीतने पर उसी प्रक्रिया को जनादेश बताती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें ईवीएम से हुए चुनावों के बाद बनीं। ऐसे में कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि जीत के समय ईवीएम विश्वसनीय और हार के समय अविश्वसनीय क्यों हो जाती है।




अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और मंत्रियों के निर्वाचन आयोग के विरोध में सड़कों पर उतरने को भी संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत बताया। उन्होंने सवाल किया कि जिस चुनावी व्यवस्था के माध्यम से कांग्रेस सत्ता में आई है, यदि उसी पर उसे भरोसा नहीं है तो क्या मुख्यमंत्री अपनी चुनावी जीत पर भी सवाल उठाएंगे।


उन्होंने कहा कि भाजपा मतदाता सूचियों की शुद्धता, पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा की पक्षधर है। कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय अपनी नीतियों और संगठन की स्थिति पर आत्ममंथन करना चाहिए।





